लेबनान में इसराइली हवाई हमला, दक्षिणी क्षेत्र में एक पूरा घर तबाह और कई लोग घायल.

दक्षिणी लेबनान में जारी सैन्य तनाव के बीच इसराइली युद्धक विमानों ने शनिवार, 19 सितंबर 2026 को एक भारी हवाई हमला किया। इस हमले में हदथा और हारिस के बीच स्थित एक रिहायशी मकान पूरी तरह से जमींदोज हो गया। लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी से मिली जानकारी के मुताबिक, यह भीषण हमला बिint जबील जिले के दायरे में हुआ है, जहां लगातार सैन्य गतिविधियां बढ़ाई जा रही हैं। इस पूरी घटना के बाद से स्थानीय लोगों में काफी डर का माहौल बना हुआ है और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं फिर से गहरी हो गई हैं।
अल-तैरी से आगे बढ़े इसराइली सैन्य वाहन और शक़्रा में हवाई हमला
उसी दिन सामने आई अन्य रिपोर्टों से यह बात भी सामने आई कि इसराइली सैन्य वाहन अल-तैरी इलाके से आगे बढ़ते हुए हदथा के बाहरी इलाकों तक पहुंच गए। इसके अलावा, इसी दिन बिint जबील जिले के ही शक़्रा शहर में भी एक अलग इसराइली हवाई हमला किया गया। इस हमले की चपेट में आने से दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें तुरंत नजदीकी तेबनीन सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। नबातियेह अल-फवका के पुराने स्क्वायर इलाके में भी इसराइली बलों द्वारा एक एम्बुलेंस टीम को निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई है, जो वहां हुए पिछले हमलों के बाद राहत और बचाव कार्य के लिए पहुंची थी।
समझौते के बावजूद जारी हैं हमले और संयुक्त राष्ट्र की कड़ी आपत्ति
यह सब घटनाएं तब हो रही हैं जब बीते 26 जून को एक अमेरिकी मध्यस्थता वाले फ्रेमवर्क समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। इस समझौते के तहत इसराइली सेना को लेबनान की जमीन से धीरे-धीरे पीछे हटना था और वहां लेबनानी सेना को तैनात होना था। हालांकि, इस समझौते को जमीन पर पूरी तरह से लागू नहीं किया जा सका है क्योंकि इसराइली बल अभी भी सीमावर्ती इलाके से 10 किलोमीटर से ज्यादा अंदर तक अपनी स्थिति बनाए हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अंतरिम बल यानी UNIFIL ने इस तरह के हमलों को लेबनान की संप्रभुता और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1701 का खुला उल्लंघन करार दिया है।
लाखों लोग हुए बेघर और हजारों की संख्या में मौतें
लेबनानी अधिकारियों की तरफ से साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मार्च महीने की शुरुआत में जब से ये सैन्य अभियान शुरू हुए हैं, तब से लेकर अब तक इस संघर्ष में लगभग 4,400 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा, 12,300 से ज्यादा लोग इन हमलों में बुरी तरह घायल हुए हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि पूरे क्षेत्र में अपने घरों को छोड़कर भागने वाले विस्थापित नागरिकों की संख्या 10 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। आम लोग बुनियादी सुविधाओं और अपने घरों से दूर शरणार्थी शिविरों या अन्य सुरक्षित स्थानों पर रहने को मजबूर हैं।