इसराइल की अदालत ने फ्रांसीसी नन पर हमला करने वाले यहूदी हमलावर को मानसिक बीमारी के आधार पर किया बरी।

Aanya26 August 20263 min read57 viewsWorld
इसराइल की अदालत ने फ्रांसीसी नन पर हमला करने वाले यहूदी हमलावर को मानसिक बीमारी के आधार पर किया बरी।

बुधवार, 26 अगस्त 2026 को यरुशलम मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एक बड़े फैसले में 36 साल के यहूदी हमलावर योना सिम्पा श्राइबर को फ्रांसीसी कैथोलिक नन पर हमला करने के आपराधिक मामलों से बरी कर दिया। जज ओफिर टिश्चलर ने सुनवाई के दौरान फैसला सुनाया कि वेस्ट बैंक के पेडेल बस्ती में रहने वाले श्राइबर इस घटना के लिए आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं माने जाएंगे। अदालत का यह फैसला सामने आने के बाद इलाके में और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों के बीच इस बात की चर्चा तेज हो गई कि आखिर मानसिक बीमारी का हवाला देकर कैसे ऐसे मामलों में फैसले सुनाए जा रहे हैं।

घटना की पूरी जानकारी और अदालत का फैसला

यह पूरी घटना इस साल 28 अप्रैल 2026 को यरुशलम के माउंट जियन पर स्थित सिनाकेल के पास हुई थी। पीड़ित महिला की उम्र 48 वर्ष थी जो फ्रांस की रहने वाली थीं और यरुशलम के फ्रेंच स्कूल ऑफ बिगनिकल एंड आर्कियोलॉजिकल रिसर्च में शोध का काम करती थीं। इस हमले के बाद उन्हें गंभीर चोटें आई थीं जिसके बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया और इलाज कराना पड़ा। शुरुआत में हमलावर श्राइबर के खिलाफ किसी धार्मिक समूह के प्रति नफरत की भावना रखकर शारीरिक नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप तय किया गया था। सरकारी वकीलों और अदालत ने जब इस मामले की गहराई से जांच की तो सामने आया कि आरोपी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी।

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मानसिक बीमारी और इलाज का आदेश

अदालत ने सरकारी psychiatric रिपोर्ट के आधार पर यह फैसला सुनाया जिसमें साफ बताया गया था कि योना सिम्पा श्राइबर सिजोफ्रेनिया नाम की गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं। रिपोर्ट में यह भी साबित हुआ कि घटना के समय वह पूरी तरह से साइकोटिक यानी मानसिक रूप से विक्षिप्त अवस्था में थे जिसकी वजह से वह अपने किसी भी काम या व्यवहार को समझने या रोकने में पूरी तरह असमर्थ थे। शुरुआत में सरकारी वकीलों ने इस मेडिकल रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे लेकिन बाद में उन्होंने भी बचाव पक्ष की इस बात का समर्थन किया कि आरोपी को जेल भेजने के बजाय उसका इलाज कराया जाना चाहिए। अदालत ने जेल भेजने का आदेश देने के बजाय यह तय किया कि आरोपी को अगले 6 सालों तक जबरन मानसिक अस्पताल में रखकर इलाज कराया जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की कोई घटना दोबारा न हो सके।

वकीलों और संगठनों की प्रतिक्रिया

अदालत में आरोपी का बचाव करने वाले वकील इडन गम्लेल ने इस पूरी घटना को एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा बताया और पीड़ित नन की भावनाओं का पूरा सम्मान करते हुए दुख जताया। इस तरह की घटनाएं पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रही हैं जहां ईसाई पादरियों और धार्मिक स्थलों पर हमले या उत्पीड़न की खबरें सामने आ रही हैं। ओक्यूपाइड फिलिस्तीनी टेरिटरीज और लेबनान में इस तरह के मामले लगातार रिकॉर्ड किए जा रहे हैं। रॉसिंग सेंटर फॉर एजुकेशन एंड डायलॉग जैसे संगठन लगातार इस बात पर नजर रख रहे हैं कि कैसे ईसाई समुदाय के लोगों के साथ मारपीट, गाली-गलौज, थूकने की घटनाएं और दीवारों पर अपमानजनक बातें लिखने के मामले बढ़ रहे हैं। नन पर हुए इस हमले के तुरंत बाद यरुशलम स्थित फ्रांसीसी कंसulates ने कड़ी निंदा की थी और आरोपी को जल्द से जल्द अदालत के सामने पेश कर सजा देने की मांग की थी।

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