इजरायली चुनाव में फंसे नतीजे और बेंजामिन नेतन्याहू की वापसी से गजा में बढ़ सकती है तबाही
राजनीतिक विश्लेषक मरवान बिशारा ने चेतावनी दी है कि बेंजामिन नेतन्याहू की वापसी से गजा में तबाही और बढ़ सकती है।

यरूशलेम: इजरायल के आम चुनाव के बाद पैदा हुए राजनीतिक गतिरोध के बीच राजनीतिक विश्लेषक मरवान बिशारा ने चेतावनी दी है कि अगर बेंजामिन नेतन्याहू दोबारा सत्ता में आते हैं, तो गजा में तबाही और ज्यादा बढ़ सकती है। अल जजीरा इंग्लिश के सीनियर पॉलिटिकल एनालिस्ट बिशारा ने 29 अक्टूबर 2026 को जारी अपने बयान में गहरी चिंता जताई कि नेतन्याहू की वापसी से अतीत जैसे ही भीषण संघर्ष फिर से शुरू हो सकता है।
27 अक्टूबर 2026 को हुए आम चुनाव में लिकुड पार्टी के नेता बेंजामिन नेतन्याहू और यशार पार्टी के गादी आइजनकोट के बीच कड़ी टक्कर देखी गई। 120 सीटों वाली नेसेट (इजरायली संसद) में किसी भी गुट को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है, जिससे वहां राजनीतिक अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।
मरवान बिशारा, जिन्होंने हाल ही में 'ट्वेल्व डेज दैट शुक द मिडिल ईस्ट: ओरिजिन्स ऑफ अ जेनोसाइड' किताब लिखी है, का कहना है कि नेतन्याहू ने गजा शांति योजनाओं को खारिज किया है। उनके मुताबिक, यह फैसला सुरक्षा की तलाश के बजाय घरेलू राजनीतिक रणनीतियों पर आधारित है।
इधर गजा में मानवीय स्थिति लगातार बिगड़ रही है। अक्टूबर 2026 के आंकड़ों के अनुसार, फंडिंग की भारी कमी के कारण खाद्य सुरक्षा साझेदार गजा के 21 लाख निवासियों में से 10 लाख से भी कम लोगों तक मदद पहुंचा पा रहे हैं।
10 अक्टूबर 2025 को हुए युद्धविराम समझौते के बावजूद सैन्य अभियान जारी रहे। 24 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट के अनुसार, इन ऑपरेशन्स में 1,522 फिलिस्तीनियों की मौत हुई और 5,421 लोग घायल हुए। फिलहाल इजरायली सेना का गजा पट्टी के करीब 63% से 70% हिस्से पर नियंत्रण है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने तीसरे देशों से अपील की है कि वे इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन रोकने और हथियारों की आपूर्ति बंद करने के लिए दबाव डालें। हालांकि, फिलिस्तीनी नागरिकों और राजनीतिक जानकारों को यह संदेह है कि इजरायली नेतृत्व बदलने से संघर्ष की दिशा में कोई बड़ा बदलाव आएगा या नहीं।