पूर्वी यरुशलम में इजरायली सेना के सुबह-सुबह छापे, कई घरों को गिराया और नए बैन से बढ़ी हलचल.

इजरायली बलों ने 8 सितंबर 2026 को तड़के सुबह occupied East Jerusalem के कई इलाकों में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया और ताबड़तोड़ छापे मारे। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान Shuafat शरणार्थी शिविर और Anata शहर को खासतौर पर निशाना बनाया गया, जिससे स्थानीय लोगों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पिछले कुछ दिनों से इस पूरे इलाके में लगातार सैन्य दबाव बढ़ाया जा रहा है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह से अस्त-व्यस्त हो गया है और लोगों का घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।
घरों को गिराए जाने से दर्जनों लोग हुए बेघर
इससे पहले 7 सितंबर को इजरायली प्रशासन ने occupied Jerusalem के उत्तर में 5 फिलिस्तीनी घरों को गिराने का सख्त आदेश जारी किया था। इनमें से तीन इमारतें अकेले Beit Hanina इलाके में स्थित थीं, जिन्हें बुलडोजर से जमींदोज कर दिया गया। इस विध्वंस की कार्रवाई के कारण कुल 21 लोग बेघर हो गए और वे खुले आसमान के नीचे आ गए। Jerusalem Governorate से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केवल अगस्त के महीने में फिलिस्तीनी संरचनाओं को निशाना बनाते हुए कुल 40 तोड़फोड़ और जमीन खाली कराने के अभियान चलाए गए। इसके अलावा, सितंबर के शुरुआती छह दिनों में ही Al-Aqsa Mosque में फिलिस्तीनियों के प्रवेश पर रोक लगाने वाले 15 नए आदेश जारी किए जा चुके हैं, जिसके बाद इस साल ऐसे कुल प्रतिबंधों का आंकड़ा 800 तक पहुंच गया है।
वेस्ट बैंक में सैन्य कार्रवाई और राजनीतिक बयानबाजी तेज
यरुशलम के अलावा वेस्ट बैंक के दूसरे इलाकों में भी सैन्य अभियान लगातार जारी हैं। 6 सितंबर को सेना ने Kafr Aqab में छापेमारी की, जहां Qalandiya शरणार्थी शिविर के पास धुआं फैलाने वाले बमों और असली गोलियों का खुलेआम इस्तेमाल किया गया। इसके बाद 7 सितंबर को Nablus के दक्षिण में स्थित Qabalan में एक अन्य छापे के दौरान सैनिकों ने धुआं फैलाने वाले गोले दागे। इन सभी घटनाओं के बाद Arab Ministerial Committee on Jerusalem ने इस तरह की कार्यवाहियों की कड़ी निंदा की और इसे कब्जा करने वालों का आतंकवाद करार देते हुए कड़े कदम उठाने की मांग की। साथ ही, समिति ने UNRWA से जुड़े Qalandia Training Center को खाली कराए जाने के फैसले पर भी गहरी आपत्ति जताई।
इस बीच, राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। Arab League के महासचिव Nabil Fahmy ने गाजा पट्टी से फिलिस्तीनी नागरिकों को जबरन हटाने के संबंध में इजरायली मंत्रियों के बयानों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है। दूसरी ओर, इजरायल के रक्षा मंत्री Israel Katz ने 7 सितंबर को यह घोषणा की कि यदि फिलिस्तीनी प्राधिकरण की ओर से अक्टूबर जैसी किसी भी संभावित चुनौती का सामना करना पड़ा, तो इजरायल उनके खिलाफ पूर्ण युद्ध छेड़ सकता है। उन्होंने इसके तहत फिलिस्तीनी नेतृत्व, सुरक्षा बलों और बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की बात कही। इससे पहले 1 सितंबर को फिलिस्तीनी प्रेसीडेंसी ने चेतावनी दी थी कि अल-अक्सा मस्जिद में लगातार हो रहे हमले और गतिविधियां इस पवित्र स्थल की कानूनी और ऐतिहासिक स्थिति को हमेशा के लिए बदलने की एक गहरी साजिश का हिस्सा हैं। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए आप QNA News की आधिकारिक रिपोर्ट देख सकते हैं।