इसराइल ने वेस्ट बैंक का फिलिस्तीनी गांव किया तबाह, 70 लोग हुए बेघर और बच्चों पर भी आई आफत.

इसराइली सेना ने दक्षिणी अधिकृत वेस्ट बैंक के मासाफर याट्टा इलाके में स्थित खिरबत अल तब्बैन नामक फिलिस्तीनी गांव को पूरी तरह से बुलडोजर चलाकर नेस्तनाबूद कर दिया। यह सैन्य कार्रवाई 2 सितंबर और 3 सितंबर 2026 के दौरान की गई, जिसके परिणामस्वरूप पूरा समुदाय जमीन पर आ गया। इस घटना के बाद वहां रहने वाले 12 परिवारों के लगभग 70 लोग बेघर हो गए हैं, जिनमें कुल 28 बच्चे भी शामिल हैं। गांव के तबाह होने के बाद स्थानीय लोगों के सामने रहने और खाने-पीने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
गांव का सारा बुनियादी ढांचा हुआ नष्ट
इस सैन्य कार्रवाई के दौरान इसराइली बलों ने गांव की हर एक जरूरी चीज को मलबे में बदल दिया। डिमोलिश की गई बुनियादी सुविधाओं में 12 आवासीय कमरे या तंबू, सात पशु शेड, एक पशु तंबू, पांच पानी के कुएं, सात बाथरूम, दो रसोई घर, दो ब्रेड ओवन, चारे का एक गोदाम और अन्य जल बुनियादी ढांचा शामिल था। इसके अलावा, सामान रखने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली आठ गुफाओं के प्रवेश द्वारों को भी या तो पूरी तरह से बंद कर दिया गया या फिर उन्हें नष्ट कर दिया गया, ताकि लोग वहां शरण न ले सकें।
अधिकारियों और मानवाधिकार संगठनों का पक्ष
इसराइली अधिकारियों और सीओजीएटी (COGAT) का कहना है कि यह कार्रवाई एक तयशुदा सैन्य फायरिंग जोन के भीतर बिना परमिट के बनाई गई संरचनाओं के खिलाफ की गई। हालांकि, बीट्लेम (B'Tselem) और फिलिस्तीनी सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स (PCHR) जैसे कई प्रमुख मानवाधिकार संगठनों ने इन कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की है। इन संगठनों का मानना है कि यह सब बस्तियों के विस्तार के लिए जमीन तैयार करने और लोगों को वहां से भगाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। मासाफर याट्टा विलेज काउंसिल के प्रमुख निदाल युनेस अबू आराम ने बताया कि निवासियों द्वारा जोनल प्लान जमा करने के पिछले सभी प्रयासों को अधिकारियों ने खारिज कर दिया था।
अक्टूबर 2023 से अब तक 66वें समुदाय का विस्थापन
यह बड़ी डिमोलिशन कार्रवाई जून 2026 में घरों की सुरक्षा के लिए दायर की गई याचिका को खारिज किए जाने के बाद सामने आई है। इससे पहले मई 2022 में इसराइली सुप्रीम कोर्ट ने इस क्षेत्र में लोगों को बेदखल करने की अनुमति दी थी। आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2023 के बाद से खिरबत अल तब्बैन 66वां ऐसा फिलिस्तीनी समुदाय है जिसे पूरी तरह से विस्थापित कर दिया गया है। घटना के तुरंत बाद, 3 सितंबर 2026 को मानवीय सहायता साझेदारों ने उस जगह का दौरा किया और बेघर हुए लोगों को आपातकालीन आपूर्ति के रूप में तंबू और कंबल बांटे। रात के समय कड़ाके की ठंड और खुले आसमान के नीचे रहने के कारण कई लोगों ने गुफाओं में रात बिताई।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हो रही है कड़ी निंदा
इस घटना के बाद पूरी दुनिया में इसराइली कार्रवाई की आलोचना हो रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून का सम्मान करने की सख्त अपील की है। वहीं, यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कलास ने चेतावनी देते हुए कहा है कि इस तरह के कदम दो-राज्य समाधान को कमजोर करते हैं। यह घटना जुलाई 2024 के उस अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के सलाहकार फैसले की पृष्ठभूमि में हुई है, जिसमें इसराइल के चल रहे कब्जे को अवैध करार दिया गया था। इसके अलावा, 3 सितंबर 2026 को रामल्लाह के पास एक अलग घटना में इसराइली सैनिकों के साथ हुए एक बसने वाले के हमले के दौरान दो फिलिस्तीनी किशोरों के मारे जाने की भी पुष्टि की गई है।