दक्षिणी लेबनान में इसराइली सेना का बड़ा हमला, गोलाबारी और हवाई हमलों से कई इलाके तबाह.

Praggya Singh sabal12 September 20263 min read15 viewsWorld
दक्षिणी लेबनान में इसराइली सेना का बड़ा हमला, गोलाबारी और हवाई हमलों से कई इलाके तबाह.

लेबनान में इसराइली सेना ने अपनी सैन्य कार्रवाई को और ज्यादा तेज कर दिया है जिसके तहत दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों में लगातार गोलाबारी और हवाई हमले किए जा रहे हैं। 12 सितंबर 2026 को मंसूरी, बाराचित और वादी अल-हुजैर जैसे प्रमुख इलाकों में भारी तबाही देखने को मिली जहां इसराइली युद्धक विमानों ने आवासीय क्षेत्रों को सीधे तौर पर निशाना बनाया। इस सैन्य कार्रवाई के दौरान एक सरकारी स्कूल पूरी तरह से ध्वस्त हो गया और उसका केवल एक छोटा सा हिस्सा ही बचा हुआ है। आम जनता के बीच इस घटना से भारी दहशत का माहौल है और लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं।

हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बड़ा एक्शन और सुरक्षा जोन का निर्माण

यह हालिया सैन्य गतिविधि 11 सितंबर 2026 की रात को हुई एक बड़ी कार्रवाई के बाद देखने को मिली है जिसमें इसराइली सैनिकों ने अली अल-ताहर रिज पर हिजबुल्लाह से जुड़े भूमिगत बुनियादी ढांचे को पूरी तरह नष्ट कर दिया था। इसराइली सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयानों के अनुसार इस ऑपरेशन के जरिए एक 'सुरक्षा जोन' बनाने का काम पूरा हो गया है जिसका मकसद हिजबुल्लाह को वहां फिर से पैर जमाने से रोकना है। इस बारे में अधिक जानकारी आधिकारिक इसराइली सरकार के संयुक्त बयान में दी गई है जिसमें इस ठिकाने को ईरान के बाहर सबसे बड़ा ईरानी वित्त पोषित इंस्टॉलेशन बताया गया है। इन धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि जमीन में 4 से ज्यादा रिक्टर स्केल का कंपन महसूस किया गया और दूर-दूर तक घरों व गाड़ियों पर मलबा आ गिरा।

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कई रिहायशी इलाके और इमारतें मलबे में तब्दील

इसराइली सेना के इन हमलों में केवल सैन्य ठिकाने ही नहीं बल्कि अल-दोउरा और बीत याहून जैसे रिहायशी इलाकों के पूरे के पूरे मोहल्ले मलबे के ढेर में बदल गए हैं। इसके अलावा मैस अल-जबल, तायबेह, नूकुरा और डेर सेरयान जैसे गांवों में बड़े पैमाने पर हुए धमाकों से सैकड़ों घर पूरी तरह से जमींदोज हो चुके हैं। नबातियेह अल-फावका में 11 सितंबर को हुए एक ड्रोन हमले में चार बेकसूर लोगों की जान चली गई जिसमें एक किंडरगार्टन की प्रिंसिपल, उनकी मां और दो घरेलू कामगार शामिल थे। वहीं दूसरी ओर इसराइली ड्रोन लेबनान की राजधानी بيروت (Beirut) और उसके दक्षिणी इलाकों के ऊपर बहुत कम ऊंचाई पर लगातार मंडराते हुए देखे गए जिससे वहां के नागरिकों की चिंताएं और अधिक बढ़ गई हैं।

राजनयिक प्रयास और बातचीत पर विराम

इस खूनी संघर्ष के बीच कूटनीतिक स्तर पर शांति स्थापित करने के प्रयास फिलहाल पूरी तरह से विफल होते नजर आ रहे हैं। लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने 12 सितंबर को यह स्पष्ट कर दिया कि इस समय कोई भी नई बातचीत शुरू नहीं हुई है और रोम में होने वाले आठवें दौर की बैठकों को लेकर चल रही सभी अफवाहें पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। अमेरिका की मध्यरस्थी से 26 जून 2026 को जो फ्रेमवर्क समझौता हुआ था उसका उद्देश्य इसराइली सेना की क्रमिक वापसी और लेबनान की सेना को तैनात करना था लेकिन नार्वेजियन शरणार्थी परिषद ने चेतावनी दी है कि यह समझौता हिंसा को रोकने में पूरी तरह असफल साबित हुआ है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के आयोजनों और आगामी छुट्टियों के चलते अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा समर्थित अगली बैठकों के दौर को अब अक्टूबर महीने तक के लिए टाल दिया गया है जबकि इस बीच इसराइल में 27 अक्टूबर को होने वाले चुनावों के चलते प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपने राजनीतिक अभियान में जुटे हुए हैं।

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