Jenin Raid: इसरायली सेना ने की फिलिस्तीनी पत्रकार अली अल-सामौदी के घर पर छापेमारी, बेटे के साथ की मारपीट

Praggya Singh sabal13 September 20263 min read22 viewsWorld
Jenin Raid: इसरायली सेना ने की फिलिस्तीनी पत्रकार अली अल-सामौदी के घर पर छापेमारी, बेटे के साथ की मारपीट

शनिवार, 12 सितंबर 2026 को इसरायली सेना ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के जेनिन शहर में रहने वाले 59 साल के जाने-माने फिलिस्तीनी पत्रकार अली अल-सामौदी (Ali al-Samoudi) के घर पर अचानक छापा मारा। इस दौरान सैनिकों ने न सिर्फ घर की तलाशी ली, बल्कि पत्रकार के बेटे के साथ मारपीट भी की और अल-सामौदी को तुरंत अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण करने का औपचारिक आदेश दिया। सैनिकों ने धमकी दी कि अगर उन्होंने बात नहीं मानी तो उनके खिलाफ और भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गनीमत यह रही कि छापेमारी के वक्त अल-सामौदी अपने घर पर मौजूद नहीं थे, वरना हालात और ज्यादा गंभीर हो सकते थे।

पत्रकार की पुरानी पृष्ठभूमि और हालिया रिहाई

अल-सामौदी अल-कुद्स अखबार के लिए संवाददाता के रूप में काम करते हैं और इसके अलावा उन्होंने सीएनएन, अल जज़ीरा और रॉयटर्स जैसे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए भी रिपोर्टिंग की है। उन्हें हाल ही में 30 अप्रैल 2026 को इसरायली प्रशासनिक हिरासत से रिहा किया गया था। उनकी यह कैद एक साल लंबी थी जो 29 अप्रैल 2025 को उनकी गिरफ्तारी के साथ शुरू हुई थी। हिरासत के उस दौर के बारे में बात करते हुए अल-सामौदी ने बताया था कि जेल में उन्हें ठीक से खाना नहीं मिला जिसके कारण उनका वजन 60 किलोग्राम तक कम हो गया था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि उन्हें शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ा और डायबिटीज तथा हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी मना कर दिया गया। इससे पहले मई 2022 में भी अल-सामौदी उस वक्त घायल हो गए थे जब वे जेनिन में अल जज़ीरा की पत्रकार शिरीन अबू अकलेह की मौत के मामले की रिपोर्टिंग कर रहे थे और इसरायली सैनिकों की गोली का शिकार बन गए थे।

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पत्रकारिता पर बढ़ते हमले और सिंडिकेट की निंदा

रामल्लाह में मौजूद मीडिया सूत्रों का कहना है कि इस छापेमारी के पीछे कोई भी स्पष्ट कानूनी वजह नहीं थी और इसे वेस्ट बैंक में स्वतंत्र पत्रकारिता के काम को रोकने की एक सोची-समझी कोशिश माना जा रहा है। फिलिस्तीनी जर्नलिस्ट्स सिंडिकेट (PJS) ने इस पूरी घटना की कड़ी निंदा की है। सिंडिकेट के आंकड़ों के मुताबिक, अकेले अगस्त के महीने में इसरायली बलों द्वारा मीडियाकर्मियों के खिलाफ 84 उल्लंघनों को दर्ज किया गया है। इन मामलों में हिरासत के दौरान एक पत्रकार की मौत और एक अन्य पत्रकार के घायल होने की गंभीर घटनाएं भी शामिल हैं। PJS और दुनिया भर के कई मानवाधिकार संगठनों ने बार-बार इस बात की चेतावनी दी है कि पत्रकारों को जानबूझकर निशाना बनाना और प्रशासनिक हिरासत का गलत इस्तेमाल करना प्रेस की स्वतंत्रता और कानून के नियमों का खुला उल्लंघन है।

यह ताजा घटना 7 अक्टूबर 2023 के बाद से पूरे वेस्ट बैंक में लगातार बढ़ रहे सैन्य छापों और गिरफ्तारियों के सिलसिले का ही एक हिस्सा है। 12 सितंबर को हुई इस छापेमारी के समय तक यह साफ नहीं हो पाया है कि पत्रकार अली al-Samoudi अधिकारियों के सामने सरेंडर करने के इस आदेश को मानेंगे या नहीं। इस तरह की घटनाएं क्षेत्र में काम कर रहे पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए लगातार खतरा बनी हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जताई जा रही है।

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