इसराइल सेना ने ना Nablus के स्कूलों में बोला धावा, फिलिस्तीनी झंडे हटाने का दिया फरमान.

इसराइली सेना ने वेस्ट बैंक के पास दो स्कूलों पर अचानक धावा बोल दिया और वहां से फिलिस्तीनी झंडों को हटाने का सख्त आदेश जारी किया। यह घटना ऐसे समय पर सामने आई जब इलाके में नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत हो रही थी और हजारों बच्चे अपने क्लासरूम में वापस लौट रहे थे। इस पूरी कार्रवाई के दौरान स्कूलों के प्रशासनिक अधिकारियों को भी धमकी दी गई जिससे स्थानीय लोगों और शिक्षा अधिकारियों के बीच काफी चिंता का माहौल बन गया है।
स्कूलों के परिसरों में घुसे सैनिक
यह पूरी घटना 6 सितंबर 2026 को हुई जो नए शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 का पहला दिन था। वफा समाचार एजेंसी और अल जजीरा इंग्लिश से मिली जानकारी के मुताबिक इसराइली सैनिकों ने नाबुलस के दक्षिण में स्थित Huwwara Boys Secondary School और नाबुलस के उत्तर-पश्चिम में स्थित Burqa Boys Secondary School के परिसरों में जबरन प्रवेश किया। सैनिकों ने स्कूल प्रशासन पर दबाव बनाया और परिसर से तुरंत फिलिस्तीनी झंडे हटाने के लिए कहा। हालांकि इन दोनों स्कूलों में हुई इस कार्रवाई के दौरान किसी भी छात्र के घायल होने या किसी की गिरफ्तारी की कोई आधिकारिक खबर सामने नहीं आई है।
शिक्षा के अधिकार पर असर
यह घटना उस समय हुई जब वेस्ट बैंक के विभिन्न इलाकों में लगभग 846,289 छात्र अपने स्कूलों में लौट रहे थे। इसी दिन एक अन्य घटना में इसराइली बलों और वहां के स्थानीय लोगों ने एक शिक्षक और दो बच्चों को कसरा इलाके में उनके स्कूल और किंडरगार्टन तक पहुंचने से रोक दिया। अधिकारियों ने इसके पीछे घरों पर लगाए गए लगातार घेराबंदी का हवाला दिया। दक्षिण नाबुलस शिक्षा निदेशालय के निदेशक Samer al-Jamal ने इस पूरी बाधा को बच्चों के शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार का सीधा उल्लंघन बताया है।
कानूनी स्थिति और नियम
इसराइल के मौजूदा कानूनों के तहत सार्वजनिक रूप से फिलिस्तीनी झंडे के प्रदर्शन पर कोई आधिकारिक पाबंदी नहीं है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत इसे सुरक्षा मिली हुई है। इसराइल के सुप्रीम कोर्ट के नियमों के अनुसार अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर तभी रोक लगाई जा सकती है जब उससे सार्वजनिक सुरक्षा को कोई बहुत बड़ा खतरा पैदा हो। इसके अलावा साल 2014 के अटॉर्नी जनरल के एक निर्देश में यह साफ किया गया था कि झंडा तभी हटाया जा सकता है जब सार्वजनिक शांति भंग होने का बहुत अधिक खतरा हो या फिर किसी आतंकवादी संगठन का समर्थन करने का पुख्ता संदेह हो। हालांकि साल 2022 और 2024 में सरकारी फंडिंग पाने वाले संस्थानों में फिलिस्तीनी झंडों पर बैन लगाने के लिए कई विधाई प्रयास किए गए थे, लेकिन वे सभी बिल अभी तक कानून का रूप नहीं ले पाए हैं। इस बारे में अधिक जानकारी आप Al Jazeera English की रिपोर्ट पर देख सकते हैं।