इजरायली राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने वेस्ट बैंक में चरमपंथी हिंसा को बताया शर्मनाक, नेतन्याहू ने भी की कड़ी निंदा.

इजराइल की राजनीति में उस वक्त एक बड़ी हलचल देखने को मिली जब देश के शीर्ष नेतृत्व ने वेस्ट बैंक के इलाकों में हो रही हिंसा पर अपनी खुलकर नाराजगी जाहिर की। 30 अगस्त 2026 को इजराइल के राष्ट्रपति Isaac Herzog ने एक बड़ा बयान देते हुए वेस्ट बैंक के कुसराह गांव में चरमपंथी यहूदी बस्तियों के लोगों द्वारा की जा रही हिंसा की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इन गैरकानूनी हमलों को इजराइल के माथे पर एक बड़ा कलंक और नैतिक रूप से बेहद शर्मनाक करार दिया। राष्ट्रपति ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की हरकतें देश के कानूनों और बुनियादी मूल्यों के खिलाफ हैं और उन्होंने सुरक्षा बलों से मांग की कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए ताकि उन्हें जल्द से जल्द न्याय के कटघरे में खड़ा किया जा सके।
नेतन्याहू की दुर्लभ टिप्पणी और राजनीतिक घमासान
राष्ट्रपति के साथ-साथ देश के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने भी कुसराह और पड़ोसी गांव जलूद में चल रही हिंसा पर अपनी नाराजगी जताई जिसे एक दुर्लभ घटना माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने इन सभी गतिविधियों को आपराधिक कॉप करार दिया और चेतावनी दी कि इस तरह की अशांति से इजरायली सेना यानी IDF को अपने काम में भारी रुकावट का सामना करना पड़ता है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को भी भारी नुकसान पहुंचता है। सरकार के दूसरे बड़े अधिकारियों ने भी इस हिंसा की खुलकर आलोचना की जिसमें Gadi Eisenkot ने इस पूरी स्थिति को सुरक्षा, नेतृत्व, कूटनीति और नैतिकता के लिहाज से एक बड़ा पतन बताया। वहीं दूसरी तरफ, पूर्व प्रधानमंत्री Naftali Bennett ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू के इस तरीके पर सवाल उठाए और कहा कि इस तरह सार्वजनिक तौर पर निंदा करने से सरकार की कमजोरी का पता चलता है और इससे सेना के जवानों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
जमीनी स्तर पर हिंसा और मीडिया पर हमला
जमीनी हकीकत पर नजर डालें तो वहां हालात काफी ज्यादा बिगड़ चुके हैं और हिंसा अपने चरम पर पहुंच गई है। नकाबपोश लोगों ने कुसराह में फलस्तीनी नागरिकों के घरों को चारों तरफ से घेर लिया था। इसके अलावा पास के ही जलूद गांव में एक बड़ी घटना तब घटी जब एनबीसी न्यूज की एक मीडिया टीम को निशाना बनाया गया जिसमें चार पत्रकार गंभीर रूप से घायल हो गए। इन बढ़ती घटनाओं के बाद सेना और बॉर्डर पुलिस को तुरंत कुसराह भेजा गया ताकि फलस्तीनी घरों के पास से लोगों को हटाया जा सके और गाड़ियों को जब्त किया जा सके। हालांकि मौके से ऐसी खबरें भी सामने आईं कि सुरक्षा बलों ने वहां के स्थानीय फलस्तीनी नागरिकों पर भी आंसू गैस के गोले छोड़े और कुछ लोगों को हिरासत में लिया, लेकिन खबर लिखे जाने तक किसी भी हमलावर को तुरंत गिरफ्तार किए जाने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई थी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता दबाव
यह पूरा घटनाक्रम साल 2026 के जून महीने में आई एक संयुक्त राष्ट्र की जांच रिपोर्ट के बाद और ज्यादा गंभीर हो गया है। उस रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया था कि इजरायली अधिकारियों की इन हमलों में सीधी मिलीभगत रही है जिसकी वजह से कई फलस्तीनी नागरिकों की जान गई और उन्हें अपना घर छोड़कर जाना पड़ा। जिनेवा में मौजूद इजराइल के मिशन ने भले ही इन सभी निष्कर्षों को सिरे से खारिज कर दिया हो, लेकिन संयुक्त राष्ट्र समेत पूरी दुनिया के देश इस बात पर कायम हैं कि वेस्ट बैंक में बस्तियां बसाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के हिसाब से पूरी तरह अवैध है। अमेरिका की तरफ से भी इस बिगड़ती हुई सुरक्षा स्थिति को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है और कड़ा दबाव बनाया जा रहा है जिसमें राजदूत Mike Huckabee, विदेश मंत्री Marco Rubio और राष्ट्रपति Donald Trump जैसे बड़े नाम शामिल हैं।