Lebanon में इसराइली सेना ने सरकारी अस्पताल को फूंका, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया युद्धापराध.

Aanya18 September 20263 min read19 viewsWorld
Lebanon में इसराइली सेना ने सरकारी अस्पताल को फूंका, स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया युद्धापराध.

दक्षिणी लेबनान में इसराइली सेना की ओर से एक बड़ी और बेहद गंभीर कार्रवाई सामने आई है। शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को इसराइली सैनिकों ने मैस अल-जबल के सरकारी अस्पताल में आग लगा दी। इस अस्पताल को कुछ रिपोर्टों में मार्जयौन के नाम से भी जाना जाता है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई और अस्पताल के चारों तरफ काले धुएं के गुबार उठने लगे। इस सैन्य कार्रवाई ने स्थानीय लोगों के लिए मुश्किलें और ज्यादा बढ़ा दी हैं क्योंकि अब वे बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं से पूरी तरह वंचित हो गए हैं।

लेबनान स्वास्थ्य मंत्रालय की कड़ी प्रतिक्रिया

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इस घटना की बेहद कड़े शब्दों में निंदा की है। मंत्रालय ने इस पूरी कार्रवाई को एक खुला, क्रूर और चौंकाने वाला हमला करार दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह इसराइली सेना के नैतिक पतन को साफ तौर पर दिखाता है। मंत्रालय के मुताबिक, इसराइली बलों ने पहले इस अस्पताल पर कब्जा कर लिया था और इसे अपने रहने के ठिकाने यानी बैरक के रूप में इस्तेमाल किया। इसके बाद जाते वक्त उन्होंने पूरी इमारत में आग लगा दी, जिससे यह ऐतिहासिक और जरूरी मेडिकल सेंटर पूरी तरह जलकर खाक हो गया।

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पहले भी हो चुका था अस्पताल क्षतिग्रस्त

यह अस्पताल दक्षिणी लेबनान के लोगों के लिए इलाज का एक बड़ा जरिया था। लेबनान सरकार इस अस्पताल को दोबारा शुरू करने की कोशिशों में जुटी हुई थी ताकि स्थानीय लोगों को बेहतर मेडिकल सुविधाएं मिल सकें। यह अस्पताल इससे पहले नवंबर 2023 और अक्टूबर 2024 की शुरुआत में हुए इसराइली हमलों में क्षतिग्रस्त हो गया था। लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए लेबनान के स्वास्थ्य मंत्री राकान नसरेद्दीन ने खुद मार्च 2025 में इस जगह का दौरा किया था और यहां के पुनर्निर्माण के कामों का जायजा लिया था। लेकिन इस ताजा आगजनी ने लेबनान के लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मदद की गु अपील

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मेडिकल ढांचे को इस तरह से नष्ट करने को एक गंभीर युद्ध अपराध और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है। इसके विरोध में मंत्रालय ने विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी WHO, रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति यानी ICRC और पूरी दुनिया के देशों से इस घटना की औपचारिक रूप से निंदा करने की अपील की है। लेबनान के प्रशासनिक अधिकारियों और नेशनल न्यूज एजेंसी ने बताया कि यह घटना अकेले नहीं घटी है। इसके साथ ही अल-मंसूरी और अल-कंतारा में भारी गोलाबारी, यातेर और जोउतार अल-शारकिया में ड्रोन हमले और डेर मिमास में सैनिकों की गतिविधियां लगातार जारी हैं। ये सभी घटनाएं उस अमरीकी मध्यस्थता वाले युद्धविराम समझौते का खुला उल्लंघन हैं जो इस साल जून के महीने में तय किया गया था।

फिलहाल इस आग से हुए कुल नुकसान और किसी भी तरह के जानमाल के नुकसान के बारे में पूरी जानकारी जुटाई जा रही है और जांच चल रही है। इस ताजा घटना से दक्षिणी लेबनान में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है। इस इलाके के शक्रा जैसे कई अन्य क्षेत्रों में भी आम नागरिकों के लगातार हो रही गोलाबारी से घायल होने की खबरें सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता की जिंदगी और ज्यादा खतरे में पड़ गई है।

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