West Bank में बड़ा चाकू हमला, इसराइल ने बढ़ाई सेना और पूर्ण युद्ध की दी चेतावनी.

Occupied West Bank के Aqraba शहर में सोमवार, 7 सितंबर 2026 को एक बड़ी घटना सामने आई, जहां ना Nablus के पास हुए एक खतरनाक चाकू हमले के बाद इसराइली सैन्य बलों ने भारी संख्या में अतिरिक्त सैनिकों को तैनात कर दिया है। इस हमले में एक 19 वर्षीय इसराइली सेलर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे एक फिलिस्तीनी हमलावर ने कई बार चाकू मारा और वाहन से मौके पर पहुंचकर फरार हो गया। घायल पीड़ित को तुरंत हेलीकॉप्टर के जरिए आपातकालीन इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी हालत पर लगातार नजर रखी जा रही है।
इसराइल का बड़ा सर्च ऑपरेशन और जवाबी कार्रवाई
इस घटना के तुरंत बाद इसराइली सेना ने बड़े पैमाने पर खोज अभियान शुरू किया और Nablus के आसपास के गांवों में सुरक्षा घेराबंदी कर दी। तलाशी के दौरान फिलिस्तीनी हमलावर ने कथित तौर पर सैनिकों पर चाकू से हमला करने की कोशिश की, जिसके बाद इसराइली बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए उसे मार गिराया। इसी दिन एक अन्य घटना में Hajja गांव में एक सैन्य छापे के दौरान इसराइली सैनिकों ने एक फिलिस्तीनी नागरिक को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। पूरे West Bank में इस समय सैन्य बंदिशें और जमीनों पर कब्जे की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो चुका है।
पूर्ण युद्ध की चेतावनी और अंतरराष्ट्रीय चिंताएं
इसराइली रक्षा मंत्री Israel Katz ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण के खिलाफ पूर्ण पैमाने पर युद्ध छेड़ने की चेतावनी दी है। उन्होंने और प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने सेना को निर्देश दिया है कि यदि फिलिस्तीनी सुरक्षा तंत्र 7 अक्टूबर जैसे हमलों को बढ़ावा देता है, तो वे हर स्थिति के लिए तैयार रहें। दूसरी ओर, हमास और फिलिस्तीनी मुजाहिडिन मूवमेंट ने इस चाकू हमले की सराहना करते हुए इसे इसराइली सैन्य कार्रवाई और बस्तियों की हिंसा का जवाब करार दिया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 8 सितंबर 2026 को बढ़ती हिंसा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। अमेरिकी समर्थित बोर्ड ऑफ पीस के प्रतिनिधि Nickolay Mladenov ने कहा कि West Bank में बढ़ती हिंसा और गाजा के हालात ने टू-स्टेट सॉल्यूशन को लगभग नामुमकिन बना दिया है। इसके अलावा, ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने भी अवैध इसराइली बस्तियों के विस्तार की निंदा करते हुए व्यापक कदम उठाने का संकल्प लिया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय OHCHR की एक रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि साल 2025 की शुरुआत में Jenin, Nur Shams और Tulkarm शरणार्थी शिविरों से 33,000 से अधिक फिलिस्तीनियों को जबरन विस्थापित किया गया, जिससे बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।