रामल्लाह के पास इजरायली बसियों की बढ़ती घुसपैठ, वेस्ट बैंक में हिंसा का तांडव

वेस्ट बैंक के राजनीतिक केंद्र रामल्लाह के आसपास के इलाकों में इजरायली बसियों की घुसपैठ और आक्रामक गतिविधियों में भारी वृद्धि देखी जा रही है। इस बढ़ते अतिक्रमण और हिंसा ने पूरे क्षेत्र में असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है। बुरका और उम्म सफा गांव के दक्षिण में वादी ज़ैतून जैसे क्षेत्रों में नए आउटपोस्ट (चौकियों) की स्थापना की खबरें सामने आ रही हैं, जो फिलिस्तीनी समुदायों के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं।
बस्तियों का विस्तार और बढ़ता खतरा
रिपोर्ट्स के अनुसार, यदि उम्म सफा क्षेत्र में नया आउटपोस्ट बनकर तैयार हो जाता है, तो यह उस गांव के आसपास बनने वाली छठी बस्ती होगी। हाल ही में बेतूनिया के पास बसियों के जमावड़े ने स्थानीय प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। वहां के मेयर ने इसे भविष्य में बस्तियों के विस्तार के लिए एक खतरनाक मिसाल बताया है।
हिंसा की घटनाएं केवल घुसपैठ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह सीधे तौर पर हमलों में बदल रही हैं। हाल ही में हुई कुछ प्रमुख घटनाओं पर एक नज़र डालते हैं:
- जालुद गांव पर हमला: 100 से अधिक बसियों ने जालुद गांव पर हमला किया, जिसमें घरों और वाहनों को आग लगा दी गई और सड़कों को बाधित किया गया। इस दौरान इजरायली सीमा पुलिस के तीन अधिकारी भी घायल हो गए।
- अल-मुघैर में तबाही: इस इलाके में भी हमलावरों ने कम से कम पांच वाहनों को आग के हवाले कर दिया।
- तायबे के पास लूटपाट: काबने समुदाय पर हमले में न केवल संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया, बल्कि बिजली और पानी की आपूर्ति भी ठप कर दी गई और नकदी भी चोरी कर ली गई।
मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 275 फिलिस्तीनी समुदायों को बसियों के हमलों का सामना करना पड़ा है। साल 2023 से अब तक 6,500 से अधिक फिलिस्तीनी अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। इस बढ़ती अस्थिरता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी चिंता में डाल दिया है।
अमेरिकी सांसदों ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए नए कानून पेश किए हैं। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य उन संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाना है जो वेस्ट बैंक के E1 क्षेत्र में निर्माण कार्यों में मदद करती हैं। अमेरिका का मानना है कि इस तरह का निर्माण भविष्य में एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य की संभावना को खत्म कर सकता है।
"इस तरह की हिंसा कानून के शासन पर एक नैतिक धब्बा है।" - इजरायली राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग
जहाँ एक ओर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इन घटनाओं को 'दंगारियों का छोटा समूह' बताया है, वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव के कारण इजरायली सरकार के लिए इन घटनाओं को नियंत्रित करना एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।