अल-अक्सा मस्जिद परिसर में घुसे इसराइली सेटेर्लस, यहूदी छुट्टियों के बीच बढ़ी तनाव की स्थिति

Aanya20 September 20262 min read0 viewsWorld
अल-अक्सा मस्जिद परिसर में घुसे इसराइली सेटेर्लस, यहूदी छुट्टियों के बीच बढ़ी तनाव की स्थिति

कब्जे वाले पूर्वी येरुसलम में अल-अक्सा मस्जिद परिसर के अंदर तनाव एक बार फिर से बहुत ज्यादा बढ़ गया है। 20 सितंबर 2026 को लगभग 90 इसराइली सेटेर्लस ने इस पवित्र स्थल के अंदर प्रवेश किया। अल जजीरा के संवाददाता के अनुसार, यह पूरी घटना इसराइली पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच हुई। इस दौरान यहूदी छुट्टियों का सीजन चल रहा था जिसमें रोश हशनाह, योम किप्पुर और सुक्कोत शामिल हैं। इस पूरी घटना के बाद से इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और ज्यादा कड़ी कर दी गई है और आम लोगों के बीच चिंता का माहौल बना हुआ है।

अल-बुराक वॉल के पास जुटे हजारों लोग

एक तरफ जहां कुछ लोग मस्जिद परिसर के अंदर गए थे, वहीं फिलिस्तीनी मीडिया ने यह भी बताया कि हजारों की संख्या में अन्य सेटेर्लस मस्जिद के पश्चिम में स्थित अल-बुराक वॉल प्लाजा के पास इकट्ठा हुए। इन लोगों ने वहां पर पारंपरिक तालमुडिक रस्में निभाईं। सितंबर के महीने में ऐसी कई घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। इससे पहले 13 सितंबर को भी लगभग 240 सेटेर्लस मोरक्को गेट के रास्ते अंदर आए थे और उन्होंने वहां प्रार्थनाएं की थीं। इन लगातार हो रही घटनाओं की वजह से स्थानीय लोगों और अधिकारियों में काफी नाराजगी देखने को मिल रही है।

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मिस्र और फिलिस्तीन की सरकारों ने की कड़ी निंदा

धार्मिक स्थलों की पवित्रता के साथ खिलवाड़ करने पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई है। 15 सितंबर को मिस्र के विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी किया। मिस्र सरकार ने इन सभी हरकतों को धार्मिक स्थलों की पवित्रता का खुला उल्लंघन बताया है। मंत्रालय ने चेतावनी दी कि इस तरह के कदम उठाने से पूरे क्षेत्र की शांति और स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। इसके अलावा, फिलिस्तीनी प्राधिकरण का प्रतिनिधित्व करने वाले येरुसलम गवर्नररेट ने भी इन घुसपैठों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने इसे 144-डनॉम क्षेत्र की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति को बदलने का एक खतरनाक प्रयास बताया। इस जगह का प्रशासनिक नियंत्रण साल 1994 की वादी अरावा संधि के तहत जॉर्डन के इस्लामिक वक्फ के पास है।

कानूनी और ऐतिहासिक समझौते का मामला

साल 1967 से चले आ रहे ऐतिहासिक स्टेटस को समझौते के नियमों के मुताबिक, गैर-मुसलमानों को इस परिसर में आने की अनुमति तो है, लेकिन वे इसके अंदर प्रार्थना नहीं कर सकते हैं। इसके बावजूद, कट्टरपंथी 'टेम्पल ग्रुप्स' लगातार यहां आने-जाने के नियमों को बदलने की कोशिश कर रहे हैं। वर्तमान में यह पूरा मामला इसराइली सुप्रीम कोर्ट में चल रहे कुछ मामलों के अधीन भी है। इस बीच, फिलिस्तीनी नमाजियों को इस पवित्र स्थल पर जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसराइली सुरक्षा बलों द्वारा उम्र से जुड़े प्रतिबंध और पहचान की कड़ी जांच लगातार की जा रही है, जिसकी जानकारी आधिकारिक स्रोतों जैसे Egypt State Information Service पर दी गई है।

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