दुबई जेल में सजा पूरी होने के बाद भी फंसे जगतिआल के शख्स, 39 लाख का जुर्माना बना मुसीबत

तेलंगाना के जगतिआल जिले के मोथकुराओपेट गांव के रहने वाले एगुरला मल्लेशम के लिए दुबई का सफर एक बुरे सपने जैसा साबित हो रहा है। मल्लेशम दुबई की अविर जेल में बंद हैं और हालांकि उनकी छह महीने की जेल की अवधि पूरी हो चुकी है, लेकिन वह अब भी रिहा नहीं हो पाए हैं। उनकी रिहाई के बीच सबसे बड़ी बाधा दुबई की अदालत द्वारा लगाया गया भारी जुर्माना है।
अदालत ने फर्जी दस्तावेजों के मामले में मल्लेशम पर 1,50,000 दिरहम का जुर्माना लगाया है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग 39.3 लाख रुपये बैठता है। नियमों के मुताबिक, जब तक यह जुर्माना नहीं भरा जाता, उन्हें रिहा नहीं किया जाएगा और जुर्माना भरने के बाद ही उन्हें भारत डिपोर्ट (देशनिकाला) किया जाएगा।
कैसे शुरू हुआ कानूनी विवाद?
मल्लेशम की मुश्किलें तब शुरू हुईं जब वह बिना वैध पासपोर्ट या वीजा के ओमान के रास्ते रेगिस्तानी इलाकों से होते हुए यूएई में दाखिल हुए। दरअसल, उन पर पहले से ही यूएई प्रवेश प्रतिबंध (Entry Ban) लगा हुआ था। वह करीब आठ साल तक वहां रहे, लेकिन 8 मार्च 2026 को एक निरीक्षण के दौरान पकड़े गए। इसके बाद कोर्ट ने उन्हें छह महीने की कैद और भारी जुर्माने की सजा सुनाई।
दुबई स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने 23 जुलाई को अविर जेल का दौरा करने के बाद इन तथ्यों की पुष्टि की। इस मामले की जानकारी तेलंगाना सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग के एनआरआई अनुभाग को ईमेल और विदेश मंत्रालय के पत्रों के माध्यम से दी गई है।
मल्लेशम की पत्नी लता, उनकी मां बुचवा और गांव के सरपंच ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी से 'सीएम प्रवासी प्रजावन' पोर्टल के जरिए मदद की गुहार लगाई है। तेलंगाना सरकार की एनआरआई सलाहकार समिति के उपाध्यक्ष मंदा भीम रेड्डी ने आश्वासन दिया है कि राज्य सरकार जुर्माना माफी या क्षमादान जैसे कानूनी विकल्पों पर विचार कर रही है। विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी इस मामले में गृह राज्य मंत्री बंदी संजय के संपर्क में हैं, ताकि इस संकट का कोई समाधान निकाला जा सके। फिलहाल, परिवार के पास इतनी बड़ी रकम जुटाने का कोई जरिया नहीं है, जिससे वह अब भी सलाखों के पीछे हैं।