फिजी को स्वतंत्रता दिवस की बधाई, जयशंकर बोले- रिश्ते और गहरे होंगे

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को फिजी गणराज्य की सरकार और वहां के लोगों को उनके स्वतंत्रता दिवस पर गर्मजोशी भरी शुभकामनाएं दीं। एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने फिजी के विदेश मंत्री सकियासी दितोका को भी संदेश भेजा और भारत की ओर से दोनों देशों के पुराने रिश्तों को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
जयशंकर ने अपने संदेश में लिखा कि भारत और फिजी की साझेदारी ऐतिहासिक भी है और लंबे समय से चली आ रही भी। उन्होंने दोहराया कि दोनों देश इस दोस्ती को और गहरा करने के लिए लगातार काम करते रहेंगे।
यह बधाई ऐसे समय में आई है जब कुछ ही हफ्ते पहले दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान न्यूयॉर्क में जयशंकर ने दितोका के साथ बातचीत की थी। उसी दिन उन्होंने प्रशांत द्वीप देशों के साथ भारत के सहयोग के लिए बने मंच, यानी फिपिक (FIPIC), की दूसरी विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता भी की थी।
प्रशांत द्वीप देशों के साथ साझेदारी पर चर्चा
विदेश मंत्रालय के अनुसार बैठक में अक्षय ऊर्जा, जलवायु कार्रवाई, आपदा से निपटने की क्षमता, शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर बात हुई। समोआ, फिजी, मार्शल आइलैंड्स, पलाऊ, पापुआ न्यू गिनी, सोलोमन आइलैंड्स और तुवालु के मंत्री इसमें शामिल हुए। प्रशांत द्वीप फोरम के महासचिव भी बैठक में मौजूद रहे।
बैठक में नेताओं ने फिपिक शिखर सम्मेलनों के नतीजों की समीक्षा की और 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित 12-सूत्रीय कार्ययोजना पर हो रही प्रगति का स्वागत किया। जयशंकर ने एक्स पर लिखा कि प्रशांत क्षेत्र को लेकर भारत का नजरिया हमेशा वहां की जरूरतों और प्राथमिकताओं पर आधारित रहा है। उनके मुताबिक भारत की नीति मांग-आधारित, विकास-उन्मुख और लोगों पर केंद्रित है।
जलवायु के मोर्चे पर भी फिजी चर्चा में रहा। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव बुधवार को फिजी में हुई यूएनएफसीसी की प्री-कॉप31 बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे थे। उन्होंने कहा कि आने वाले कॉप31 की सफलता नए लक्ष्यों या घोषणाओं से नहीं, बल्कि जमीन पर ठोस काम से आंकी जानी चाहिए। उन्होंने मौजूदा वादों को पूरा करने और पेरिस समझौते को लागू करने की रफ्तार बढ़ाने पर जोर दिया।
भारत और फिजी के बीच संबंध सांस्कृतिक, आर्थिक और लोगों के आपसी जुड़ाव पर टिके हैं। बीते कुछ वर्षों में दोनों देशों ने जलवायु, स्वास्थ्य और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग का दायरा लगातार बढ़ाया है।