रूस के लिए भारत स्वाभाविक विकल्प, यूरोप से तनाव के बीच बोले जयशंकर

Aanya13 October 20262 min read0 viewsIndia
रूस के लिए भारत स्वाभाविक विकल्प, यूरोप से तनाव के बीच बोले जयशंकर

नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा कि यूरोप के साथ तनावपूर्ण रिश्तों के बीच रूस जिस तरह एशिया की ओर बढ़ रहा है, उसमें भारत उसके लिए एक स्वाभाविक विकल्प है। उन्होंने भारत और रूस के संबंधों को पिछले आठ दशकों से स्थिर बताया।

जयशंकर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के एडिटर-इन-चीफ जॉन माइकलथवेट के साथ बातचीत में यह बात कही। उनके मुताबिक यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और यूरोप के रिश्ते कड़वाहट भरे हो गए हैं, जिसके कारण मॉस्को का झुकाव एशिया, खासकर चीन की ओर बढ़ा है।

जयशंकर ने कहा, "आज रूस और यूरोप के बीच लगभग टूटा हुआ, कड़वाहट भरा रिश्ता साफ दिखता है। यूक्रेन युद्ध का नतीजा यह है कि रूस को मजबूरन एशिया की ओर ज़्यादा मुड़ना पड़ा है। यह हमारे और दुनिया, दोनों के हित में है कि रूस के पास कई विकल्प हों और एशिया में उसके ऐसे संबंध हों जिनका बड़ा वजन हो।"

GulfHindi की हर खबर सबसे पहलेJoin

उन्होंने कहा कि इस मामले में भारत एक स्वाभाविक विकल्प है, क्योंकि शुरुआत से ही भारत के रूस के साथ अच्छे संबंध रहे हैं और वे स्थिर बने हुए हैं। अभी भारत का काम अपने रिश्ते को बनाए रखना है।

जयशंकर ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और रूस के रणनीतिक समीकरण बदलने के बावजूद भारत रूस को भरोसा दिला रहा है कि पिछले 75-80 वर्षों में बना यह रिश्ता कायम है। उनके मुताबिक भारत इस बदलाव पर कोई मूल्य-निर्णय नहीं दे रहा।

उन्होंने कहा, "यह ऐसा विकल्प है जो हम दोनों के लिए काम कर चुका है। इसका एशिया में शक्ति संतुलन और मौजूदा स्थिति पर स्थिर असर रहा है, और हमें लगता है कि यह अच्छी बात है।"

जयशंकर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब यूरोपीय संघ यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाने में लगा है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलास ने सोमवार को रूस के सैन्य-औद्योगिक तंत्र और रूस-कब्ज़े वाले यूक्रेनी इलाकों में कराए गए चुनावों से जुड़े व्यक्तियों पर लगभग 1,600 प्रतिबंध सूची में डालने की घोषणा की।

यूरोपीय परिषद की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संघ ने 1,569 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं, जिनमें 826 रूसी कंपनियां और उन कंपनियों के 743 मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल हैं। इस नए पैकेज के बाद यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करने वाली यूरोपीय संघ की प्रतिबंध सूची में कुल व्यक्तियों और संस्थाओं की संख्या लगभग 4,600 हो गई है।

कैलास ने कहा, "मुख्य मुद्दा यूक्रेन युद्ध है। हम रूस के सैन्य-औद्योगिक तंत्र के संबंध में 1,600 सूचियां आगे रख रहे हैं, और रूस में यूक्रेन के कब्ज़े वाले इलाकों को लेकर हुए दिखावटी चुनावों पर भी।" प्रतिबंधों के निशाने पर वे कंपनियां हैं जो मिसाइल, मानव-रहित हवाई वाहन और विमानों में इस्तेमाल होने वाले उन्नत रूसी हथियार प्रणालियों के पुर्ज़े सप्लाई करती हैं। इनमें सेमीकंडक्टर, माइक्रोसर्किट, कंप्यूटर, संचार उपकरण, रडार प्रणाली और विमानन व मिसाइल तकनीक जैसे उत्पाद शामिल हैं।

Share:

Comments

Leave a comment