यमन और जिबूती में मानवीय संकट: जापान ने दी 10 मिलियन डॉलर की आपातकालीन मदद

यमन में जारी भीषण संघर्ष और उससे पैदा हुए मानवीय संकट को देखते हुए जापान सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। जापान ने यमन और जिबूती की मदद के लिए 10 मिलियन डॉलर की आपातकालीन अनुदान सहायता देने की घोषणा की है। यह फैसला उस समय आया है जब जुलाई 2026 से हूती विद्रोहियों की बढ़ती हिंसक गतिविधियों ने क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर दी है, जिससे लाखों लोग बेघर हो गए हैं।
जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोटेगी ने इस सहायता पर जोर देते हुए कहा कि मध्य पूर्व, विशेष रूप से बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य (Bab el-Mandeb Strait) के आसपास शांति और स्थिरता अंतरराष्ट्रीय समुदाय और जापान की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। आंकड़ों की मानें तो 1 अगस्त से 3 अक्टूबर 2026 के बीच ही करीब 1,80,312 लोग विस्थापित हुए हैं, जिससे स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
सहायता राशि का वितरण और उपयोग
जापान द्वारा घोषित इस कुल फंड में से 8 मिलियन डॉलर सीधे यमन के लिए आवंटित किए गए हैं, जबकि 2 मिलियन डॉलर जिबूती को दिए जाएंगे, जहाँ शरणार्थियों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। यमन में इस राशि का वितरण इस प्रकार किया जाएगा:
- विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP): खाद्य सहायता के लिए 3 मिलियन डॉलर।
- इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC): स्वास्थ्य, पानी, स्वच्छता और हाइजीन सेवाओं के लिए 3 मिलियन डॉलर।
- इंटरनेशनल ऑर्गनाइजेशन फॉर माइग्रेशन (IOM): आश्रय और अन्य गैर-खाद्य आवश्यक वस्तुओं के लिए 2 मिलियन डॉलर।
वहीं, जिबूती के लिए निर्धारित 2 मिलियन डॉलर का प्रबंधन संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त (UNHCR) द्वारा किया जाएगा, ताकि वहां पहुंचे शरणार्थियों को सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जा सकें।
जापानी अधिकारियों का मानना है कि इस वित्तीय मदद से न केवल क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि युद्ध के दुष्प्रभावों को भी कम किया जा सकेगा। यह सहायता ऐसे समय में आई है जब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने यमन के स्वास्थ्य क्षेत्र में फंड की भारी कमी की चेतावनी दी थी और UNHCR ने अपनी संचालन गतिविधियों को जारी रखने के लिए 25 मिलियन डॉलर की जरूरत जताई थी।