जापान ने अमेरिका-ईरान जंग रोकने को कूटनीति तेज की, पर बात अटकी
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता रुकने के बाद जापान ने कूटनीतिक प्रयास तेज किए हैं। जानें क्या हैं दोनों देशों की शर्तें।

टोक्यो: अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को खत्म करने के लिए जापान ने अपनी कूटनीतिक कोशिशें काफी बढ़ा दी हैं, हालांकि अब तक कोई ठोस शांति समझौता नहीं हो पाया है। प्रोफेसर दाइसाकु हिगाशी के मुताबिक, बातचीत में गतिरोध का मुख्य कारण दोनों देशों के अलग-अलग नजरिए हैं। अमेरिका जहां एक ही बार में व्यापक समझौते (वन-शॉट डील) पर जोर दे रहा है, वहीं ईरान चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की मांग कर रहा है।
ईरान ने बातचीत में प्रगति के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। तेहरान चाहता है कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की स्थिति को सुलझाया जाए, अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाए जाएं और ईरान की जमी हुई संपत्तियां वापस की जाएं।
इस तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की है, जिसमें केशम द्वीप पर ईरानी हवाई रक्षा प्रणाली पर लक्षित हमले शामिल हैं। इसके अलावा वॉशिंगटन ने 'आयरन गेट' टास्क फोर्स का गठन किया है। इसका मकसद ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकाबंदी को जमीनी परिवहन तक बढ़ाना और सप्लाई नेटवर्क को बाधित करना है।
ईरानी सैन्य प्रवक्ता हुसैन मोहेब्बी ने इस टास्क फोर्स को महज 'शब्दों का खेल' बताया है। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना बिना किसी भौगोलिक सीमा के रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है। दूसरी ओर, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने तेहरान से अपील की है कि वह राजनयिक समाधान के लिए 'अधिकतम लचीलापन' दिखाए।
जापान की यह कोशिशें पुरानी पहल का हिस्सा हैं। पूर्व प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने जून 2026 के एक समझौता ज्ञापन (MoU) के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने की उम्मीद जताई थी।
इस बीच कतर भी मध्यस्थता के जरिए एक ढांचा तैयार करने की कोशिश कर रहा है। इसमें प्रस्ताव है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को ईरानी सुविधाओं में वापस आने दिया जाए, जिसके बदले में नौसैनिक नाकाबंदी में ढील दी जाए और कुछ वित्तीय संपत्तियां अनलॉक की जाएं। तुर्की, यूएई और रूस भी इस कूटनीतिक प्रक्रिया में शामिल हैं। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसिन रजाई के साथ चर्चा के बाद संघर्ष खत्म करने में मदद करने की इच्छा जताई है।