भारत में 100 से ज्यादा जापानी कंपनियों ने बनाए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर अब एआई और इंजीनियरिंग पर बढ़ा फोकस

Lov Singh21 October 20262 min read0 viewsEnglish
भारत में 100 से ज्यादा जापानी कंपनियों ने बनाए ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर अब एआई और इंजीनियरिंग पर बढ़ा फोकस

नई दिल्ली: भारत में जापानी कंपनियों का रुझान अब सिर्फ लागत कम करने या बैक-ऑफिस सपोर्ट तक सीमित नहीं रहा। कुशमैन एंड वेकफील्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 100 से ज्यादा जापानी कंपनियों ने भारत में अपने ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) स्थापित किए हैं या उनका विस्तार किया है। अब ये केंद्र मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंजीनियरिंग, प्रोडक्ट डेवलपमेंट और साइबर सिक्योरिटी जैसे हाई-वैल्यू कामों पर ध्यान दे रहे हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि जापानी GCC अब डिजिटल प्रोडक्ट डेवलपमेंट, ऑटोमेशन, एडवांस एनालिटिक्स और इंजीनियरिंग समाधानों के लिए 'सेंटर ऑफ एक्सीलेंस' के रूप में काम कर रहे हैं। ये केंद्र अब कंपनियों के वैश्विक बिजनेस ऑपरेशंस और फैसले लेने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा बन गए हैं।

कुशमैन एंड वेकफील्ड की एमडी (APAC टेनेंट रिप्रेजेंटेशन एंड GCC एडवाइजरी) अर्पिता श्रीवास्तव ने कहा कि यह अब केवल आउटसोर्सिंग की कहानी नहीं है। जापानी कंपनियां सिर्फ खर्च घटाने के लिए भारत नहीं आ रही हैं, बल्कि वे ऐसे रणनीतिक केंद्र बना रही हैं जो बिजनेस वैल्यू बढ़ाएं, इनोवेशन लाएं और वैश्विक बदलाव की पहल में मदद करें।

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इस विस्तार के पीछे भारत में विज्ञान, तकनीक, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) के क्षेत्र में उपलब्ध बड़ी प्रतिभा को मुख्य कारण माना गया है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल करीब 25 लाख से 28 लाख STEM ग्रेजुएट्स निकलते हैं। इसके अलावा, देश का बिजनेस इकोसिस्टम और ऑफिस इंफ्रास्ट्रक्चर भी इन केंद्रों के विकास में मददगार साबित हो रहा है।

बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जापानी GCC के लिए प्रमुख ठिकाने बने हुए हैं, हालांकि कंपनियां अब नए टैलेंट मार्केट्स की भी तलाश कर रही हैं। इस बढ़ते रुझान से कमर्शियल रियल एस्टेट क्षेत्र में भी मौके बढ़े हैं और जापानी निवेश से ऑफिस कैंपस व टेक्नोलॉजी पार्क विकसित हो रहे हैं।

अर्पिता श्रीवास्तव के मुताबिक, अब कंपनियां इस बात पर विचार नहीं कर रही हैं कि केंद्र बनाना है या नहीं, बल्कि इस पर ध्यान दे रही हैं कि वे अपनी रणनीतिक क्षमताओं को कितनी तेजी से बढ़ा सकती हैं। अगले दशक में जापानी कंपनियां भारत के GCC इकोसिस्टम में और बड़ी भूमिका निभाएंगी और भारत उनके लिए इनोवेशन का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनेगा।

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