जेद्दाह में हिजाजी तटीय वास्तुकला अनिवार्य, नए नियमों की घोषणा

लाल सागर के किनारे बसे खूबसूरत शहर जेद्दाह की पहचान अब और भी ज्यादा पारंपरिक और आकर्षक होने जा रही है। जेद्दाह नगर पालिका यानी अमन जेद्दाह ने एक नया और सख्त नियम लागू किया है, जिसके तहत शहर में बनने वाली नई इमारतों और मौजूदा भवनों के बाहरी हिस्सों (फेसड) की मरम्मत के लिए 'हिजाजी कोस्टल आर्किटेक्चर' (Hejazi Coastal Architecture) के दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आधुनिक और अत्यधिक कांच वाली इमारतों के दौर में शहर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को बचाकर रखना है।
क्या हैं नए वास्तुकला नियम?
मई 2026 में पेश किए गए इन दिशा-निर्देशों को अब और अधिक कड़ाई से लागू किया जा रहा है। जेद्दाह के अल-हमरा, अश्-शाती, अस्-सलामा, अल-खालिदिया, अल-रौदा, अल-अंदलुस और ओभुर जैसे सभी प्रमुख क्षेत्रों में यह नियम प्रभावी हो गया है। पहले यह शैली मुख्य रूप से ऐतिहासिक अल-बालद जिले तक सीमित थी, लेकिन अब इसका विस्तार पूरे शहर में कर दिया गया है।
नियमों के तहत निर्माण कार्यों में निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना होगा:
- पारंपरिक स्थानीय सामग्रियों और लकड़ी (या इसके आधुनिक विकल्पों) का उपयोग।
- पर्ल व्हाइट (मोती जैसी सफेद) और रेतीले (सैंडी) रंगों के पैलेट का इस्तेमाल।
- पारंपरिक मंश्रबिया या रवासीन स्क्रीन (Mashrabiya/Rawasheen) और प्राकृतिक छायांकन तकनीकों का समावेश।
- तटीय सौंदर्यशास्त्र से मेल न खाने वाले कांच के बाहरी हिस्सों (Glass Facades) पर पूरी तरह रोक।
नियम तोड़ने पर लगेगा भारी जुर्माना
अमन जेद्दाह ने स्पष्ट कर दिया है कि इन नियमों की अनदेखी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और इसके लिए अलग-अलग स्तर पर कड़े जुर्माने तय किए गए हैं:
- इंजीनियरिंग कार्यालय: यदि कोई इंजीनियरिंग ऑफिस परमिट आवेदन में इन दिशानिर्देशों को शामिल नहीं करता है, तो उसे 1,000 से 5,000 रियाल तक का जुर्माना भरना पड़ सकता है। दोबारा गलती करने पर यह जुर्माना दोगुना हो जाएगा और सुधार के लिए अधिकतम 7 दिन का समय मिलेगा।
- ठेकेदार और पर्यवेक्षक: यदि अनुमोदित डिजाइन से किसी भी प्रकार का विचलन पाया जाता है, तो ठेकेदार कार्यालयों पर 2,000 से 10,000 रियाल तक का जुर्माना लग सकता है, और सुधार के लिए 30 दिन का समय दिया जाएगा।
- मकान मालिक: परमिट मिलने के बाद यदि कोई आवासीय भवन मालिक बाहरी डिजाइन में बदलाव करता है, तो उसे 100 से 500 रियाल तक का जुर्माना देना होगा, जिसे दोबारा गलती करने पर दोगुना कर दिया जाएगा।
आम नागरिकों और निवासियों पर असर
इस नए बदलाव से संपत्ति मालिकों और निवासियों के लिए शुरुआती निर्माण लागत थोड़ी बढ़ सकती है। हालांकि, जिन इमारतों के बाहरी हिस्से पहले से बने हुए हैं और उनमें कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है, उन्हें तुरंत बदलने की जरूरत नहीं है। लेकिन किरायेदारों और मकान मालिकों को यह सलाह दी गई है कि बालकनी, एसी यूनिट या रंगों में किसी भी तरह का अनाधिकृत बदलाव करने से बचें, अन्यथा इसके लिए मालिक को आर्थिक दंड भुगतना पड़ सकता है।
यह ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहल देश की एक बड़ी राष्ट्रीय योजना का हिस्सा है, जिसे यनबु और कुनफुधा जैसे अन्य तटीय क्षेत्रों में भी लागू किया जा रहा है। जेद्दाह की वास्तुकला को उसका पुराना गौरव वापस दिलाने की दिशा में यह एक ऐतिहासिक कदम साबित होगा।