जेरेमी कॉर्बिन ने किया साफ, इस्राइल के बैन के बाद भी फिलिस्तीन के समर्थन में जारी रहेगी आवाज

ब्रिटिश संसद के सदस्य Jeremy Corbyn ने हाल ही में यह स्पष्ट कर दिया है कि इस्राइल सरकार द्वारा लगाए गए बैन से उनकी आवाज नहीं दबेगी। 10 सितंबर 2026 को Al Jazeera English पर प्रकाशित एक ओपिनियन पीस में उन्होंने दो टूक कहा कि इस्राइल उनके रुख को रोकने में कामयाब नहीं होगा। यह पूरा मामला तब सामने आया जब इस्राइल सरकार ने जेरेमी कॉर्बिन समेत 11 ब्रिटिश सांसदों के देश में प्रवेश पर रोक लगा दी। इस पाबंदी के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस पर चर्चा शुरू हो गई है।
बैन को बताया रणनीति
जेरेमी कॉर्बिन ने इस प्रतिबंध को इस्राइल की एक सोची-समझी रणनीति करार दिया। उनका कहना था कि इस्राइल फिलिस्तीनियों पर हो रहे अत्याचारों से दुनिया का ध्यान भटकाना चाहता है। इसके साथ ही वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय ऑब्जर्वर गाजा और वेस्ट बैंक के हालातों को खुद न देख सकें। उन्होंने अपने बयान में यह भी दोहराया कि वे फिलिस्तीन में जारी कब्जे को खत्म करने के लिए अपनी मुहिम जारी रखेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां के लोगों को रंगभेद और नरसंहार जैसे हालात का सामना करना पड़ रहा है।
ब्रिटेन की नीति में बदलाव
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ब्रिटेन की सरकार की नीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। 9 सितंबर 2026 को ब्रिटिश विदेश सचिव Ed Miliband ने अधिकृत वेस्ट बैंक की अवैध इस्रायली बस्तियों से आने वाले सामान के आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। इतना ही नहीं, उन्होंने इस्राइल की कार्यवाहियों को "ethnic cleansing" यानी नस्लीय सफाया करार दिया। जेरेमी कॉर्बिन ने इस फैसले का स्वागत तो किया, लेकिन साथ ही ब्रिटिश सरकार से यह भी मांग की कि वे इस्राइल के साथ सभी प्रकार के हथियारों की बिक्री और सैन्य सहयोग को पूरी तरह से बंद कर दें।
दूसरी ओर, गाजा के उत्तरी इलाकों में इस्रायली हमलों में कम से कम चार फिलिस्तीनियों की मौत की खबर सामने आई है। इसके अलावा वेस्ट बैंक में बने इस्रायली चेकपॉइंट्स की वजह से वहां की स्थानीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हो रही है और आम लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।