जॉर्डन एयर डिफेंस ने रोकी ईरान की मिसाइलें, क्षेत्रीय तनाव के बीच देश की सेना पूरी तरह से सतर्क.

क्षेत्रीय तनाव के बीच जॉर्डन की सेना ने अपनी वायु सीमा सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। 4 सितंबर 2026 को जॉर्डन के सशस्त्र बलों ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने देश के एयरस्पेस में दाखिल होने वाली ईरानी मिसाइलों को सफलतापूर्वक रोक लिया। यह घटना 1 सितंबर से 3 सितंबर 2026 के दौरान हुई घटनाओं के बाद सामने आई है, जिसमें ईरान ने अमेरिकी सहयोगियों और सैन्य ठिकानों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करते हुए कई बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दागे थे। सैन्य अधिकारियों के अनुसार, 2 सितंबर 2026 को जॉर्डन की रक्षा प्रणाली ने उनके एयरस्पेस में प्रवेश करने वाली 13 में से 10 ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, जबकि बाकी की तीन मिसाइलें सुनसान इलाकों में गिरीं जिनसे किसी भी तरह का जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।
जॉर्डन के विदेश मंत्री का कड़ा बयान
जॉर्डन के विदेश मंत्री Ayman Safadi ने 4 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि देश अपनी क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा की रक्षा के लिए अपने संप्रभु अधिकार का पूरी तरह से इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि ईरान इस मौजूदा युद्ध की शुरुआत से बहुत पहले से उन पर और क्षेत्र के कई अन्य देशों पर हमले करता आ रहा है। उन्होंने ईरान के तर्कों को खारिज करते हुए इस बात पर जोर दिया कि जॉर्डन इस चल रहे संघर्ष का कोई पक्षकार नहीं है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, देश के एयरस्पेस को सुरक्षित रखने के लिए जॉर्डन की सेना पूरी तरह से हाई अलर्ट पर बनी हुई है और हर स्थिति पर पैनी नजर रख रही है। आप इस पूरी जानकारी को आधिकारिक WAM News पोर्टल पर पढ़ सकते हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव
इन हमलों के पीछे ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का हाथ बताया जा रहा है, जिसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों के खिलाफ प्री-एम्प्टिव यानी पहले हमले करने की अपनी नई नीति की ओर इशारा किया है। अमेरिका ने जॉर्डन के भीतर अपने सैन्य कर्मियों और एयर डिफेंस सिस्टम को तैनात किया हुआ है, जिन्होंने इन मिसाइलों को रोकने की प्रक्रिया में पूरी मदद की। हालांकि ईरानी अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने हालिया अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों के जवाब में अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाया है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इन झड़पों के दौरान किसी भी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने की खबर से साफ इंकार किया है। इस पूरे घटनाक्रम से मध्य पूर्व के देशों में रहने वाले प्रवासियों और आम नागरिकों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।