जॉर्डन एयर डिफेंस ने रोकी ईरान की मिसाइलें, अमेरिका के सैन्य ठिकानों को बनाया गया था निशाना.

Praggya Singh sabal1 September 20262 min read34 viewsWorld
जॉर्डन एयर डिफेंस ने रोकी ईरान की मिसाइलें, अमेरिका के सैन्य ठिकानों को बनाया गया था निशाना.

सोमवार, 31 अगस्त 2026 की सुबह जॉर्डन के आसमान में बड़ा तनाव देखने को मिला, जब देश की सेना ने ईरान की तरफ से दागी गई मिसाइलों को हवा में ही तबाह कर दिया। जॉर्डन के अधिकारियों ने जानकारी दी कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की तरफ से ये मिसाइलें देश में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बर्बाद करने के लिए भेजी गई थीं। लेकिन समय रहते जॉर्डन की रक्षा प्रणाली ने अपनी ताकत दिखाते हुए सभी खतरनाक हमलों को आसमान में ही नाकाम कर दिया, जिससे किसी भी तरह का बड़ा नुकसान होने से बच गया।

मिसाइल हमलों की पूरी कहानी और जॉर्डन की कार्रवाई

सोमवार की सुबह कुल आठ मिसाइलों ने जॉर्डन की सीमा और एयरस्पेस को पार किया था। जॉर्डन की вооруबंद सेना (Armed Forces) ने तुरंत एक्शन लेते हुए देश के अलग-अलग हिस्सों में, खासकर मफराक (Mafraq) शहर के पास इन सभी मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। सरकार की तरफ से साफ किया गया कि इस सफल बचाव अभियान के कारण देश के नागरिकों और संपत्ति को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुँचा। इस घटना के बाद सोशल मीडिया और कई मीडिया रिपोर्ट्स में आसमान में हुए धमाकों और मिसाइल रोधी गतिविधियों के वीडियो भी तेजी से वायरल होने लगे थे, जिसके बाद अल जज़ीरा इंग्लिश (Al Jazeera English) ने भी इस पर विस्तृत रिपोर्टिंग की।

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ईरान और अमेरिका के बीच क्यों बढ़ा तनाव

ईरान के संगठन IRGC ने खुद यह माना कि उन्होंने ये बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन लॉन्च किए थे। ईरान का कहना था कि यह हमला उन्होंने रविवार, 30 अगस्त 2026 को अमेरिका द्वारा लार्क द्वीप (Larak Island) पर किए गए हमले के जवाब में किया है। अमेरिकी सेना ने उस कार्रवाई को लेकर बताया था कि उन्होंने ईरान की उस गतिविधि को रोकने के लिए सीमित कदम उठाया था, जिसमें ईरानी बल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पानी के भीतर बिछाई जाने वाली बारूदी सुरंगों को तैनात करने की तैयारी कर रहे थे। अमेरिका का साफ कहना था कि उनका मकसद केवल कमर्शियल जहाजों और आम नाविकों की सुरक्षा करना था।

दावों और हकीकत की सच्चाई

ईरान के सरकारी मीडिया संस्थान IRIB ने अपने बयान में दावा किया था कि उनके द्वारा किए गए पलटवार में अमेरिका के लक्षित सैन्य अड्डे पूरी तरह तबाह हो गए और वहां भारी नुकसान हुआ है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। फॉक्स न्यूज (Fox News) को दिए गए बयान में एक अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि सभी प्रोजेक्टाइल को रास्ते में ही रोक लिया गया था और अमेरिकी सेना या परिसंपत्तियों को किसी भी तरह का महत्वपूर्ण नुकसान नहीं हुआ। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने भी ईरान के उन सभी आरोपों को झूठा बताया जिसमें अमेरिकी आक्रामकता की बात कही जा रही थी। इस पूरे घटनाक्रम के बीच गल्फ देशों में रहने वाले लोगों और वहां यात्रा करने वाले प्रवासियों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंताएं जरूर पैदा हुई हैं, हालांकि स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है।

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