जॉर्डन के हवाई हमलों में नागरिकों की मौत के बाद दमिश्क में सरकार के खिलाफ बढ़ सकता है गुस्सा
जॉर्डन के हवाई हमलों में नागरिकों की मौत के बाद दमिश्क में गुस्सा है। विश्लेषकों ने सरकार के खिलाफ आंतरिक विरोध की चेतावनी दी है।

दमिश्क: जॉर्डन द्वारा सीरियाई जमीन पर किए गए हवाई हमलों के बाद अब दमिश्क में आंतरिक विरोध की आशंका बढ़ गई है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि अगर सीरियाई सरकार ने जवाबदेही तय करने के बजाय जॉर्डन के साथ राजनयिक संबंधों को प्राथमिकता दी, तो जनता का गुस्सा सरकार की ओर मुड़ सकता है।
यह पूरा विवाद 26 अक्टूबर 2026 को जॉर्डन द्वारा किए गए हवाई हमलों से शुरू हुआ। जॉर्डन की सेना ने इन हमलों को 'ऑपरेशन जॉर्डनियन डिटरेंस - हमूद' का नाम दिया था। जॉर्डन का दावा था कि ये हमले उन आतंकी संगठनों को निशाना बनाकर किए गए, जिन्होंने 23 अक्टूबर को जॉर्डन के करक में एक ग्रीक ऑर्थोडॉक्स चर्च पर हमला किया था।
जॉर्डन के मुताबिक इन हमलों में कई उग्रवादी मारे गए और उनके वाहन नष्ट हुए। हालांकि, इस सैन्य कार्रवाई में दारा और सुवेदा प्रांतों में सात से आठ आम नागरिक भी मारे गए, जिनमें महिलाएं और बच्चे शामिल थे।
सीरिया के विदेश मंत्रालय ने 27 अक्टूबर को इन हमलों की कड़ी निंदा की और इसे हवाई क्षेत्र का अनधिकृत उल्लंघन बताया। सीरिया ने जॉर्डन के इस दावे को खारिज कर दिया कि इन हमलों से पहले आपसी समन्वय किया गया था। विरोध स्वरूप सीरिया ने नसीब बॉर्डर क्रॉसिंग को अस्थायी रूप से बंद कर दिया और जॉर्डन के राजदूत को बुलाकर औपचारिक विरोध दर्ज कराया।
तनाव कम करने के लिए 28 अक्टूबर को सीरियाई विदेश मंत्री असद अल-शैबानी और जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमान सफादी के बीच बातचीत हुई। इस बैठक के बाद दोनों देश एक संयुक्त सुरक्षा समिति बनाने पर सहमत हुए। इस समिति का काम घटना की जांच करना, खुफिया जानकारी साझा करना और सीरिया की संप्रभुता की रक्षा करना होगा। मंत्री सफादी ने नागरिकों की मौत पर गहरा दुख जताया और सीरिया की सुरक्षा और स्थिरता के प्रति जॉर्डन की प्रतिबद्धता दोहराई।
नसीब बॉर्डर क्रॉसिंग अब दोबारा खोल दी गई है, लेकिन अल जजीरा इंग्लिश और द सीरियन ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के अनुसार सीरियाई जनता में नागरिकों की मौत को लेकर अब भी गहरा दुख और गुस्सा है। अंतरिम राष्ट्रपति अहमद अल-शरा के नेतृत्व वाली सरकार के सामने अब अम्मान के साथ राजनयिक रिश्तों को संभालने और देश की सुरक्षा व नागरिकों की रक्षा को लेकर बढ़ते घरेलू गुस्से को शांत करने की दोहरी चुनौती है।