जॉर्डन में चर्च पर हुए जानलेवा हमले के तीन संदिग्ध सुरक्षा बलों ने किए गिरफ्तार

जॉर्डन के करक में चर्च हमले के बाद सुरक्षा बलों ने तीन संदिग्धों को गिरफ्तार किया है। इस हमले में 9 लोगों की मौत हुई थी।

Gautam Sahu26 October 20262 min read0 viewsWorld
जॉर्डन में चर्च पर हुए जानलेवा हमले के तीन संदिग्ध सुरक्षा बलों ने किए गिरफ्तार

करक (जॉर्डन): जॉर्डन की सुरक्षा एजेंसियों ने सोमवार को उन तीन संदिग्धों को गिरफ्तार कर लिया है, जिन्होंने करक प्रांत के हमूद गांव में स्थित ग्रीक ऑर्थोडॉक्स सेंट जॉर्ज चर्च पर हमला किया था। यह कार्रवाई 26 अक्टूबर 2026 को की गई।

शुक्रवार, 23 अक्टूबर को एक अंतिम संस्कार के दौरान हुए इस आतंकी हमले में नौ लोगों की जान चली गई थी। इस घटना में 34 से 40 लोग घायल हुए थे, जिनमें मोहम्मद अल-कासस भी शामिल थे। रिपोर्ट के मुताबिक घायलों में एक मुस्लिम शोक मनाने वाला व्यक्ति भी था।

पब्लिक सिक्योरिटी डायरेक्टरेट ने गिरफ्तार किए गए लोगों की पहचान जॉर्डन के नागरिकों के रूप में की है। इनमें दो भाई हज्जा ज़ैदान मोहम्मद और मिशाल ज़ैदान मोहम्मद के साथ उनके साले अहमद समी हुसैन शामिल हैं। सुरक्षा बलों ने इन तीनों को अल-जुदैया गांव के एक खाली घर में छिपा हुआ पाया।

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गिरफ्तारी के दौरान संदिग्धों ने आत्मसमर्पण करने से इनकार कर दिया और सुरक्षा कर्मियों पर गोलीबारी शुरू कर दी। करीब तीन घंटे तक चली इस मुठभेड़ में तीनों संदिग्ध घायल हो गए, जिनमें से एक की हालत नाजुक बताई जा रही है। हालांकि, इस झड़प में कोई सुरक्षा अधिकारी घायल नहीं हुआ।

पब्लिक सिक्योरिटी डायरेक्टरेट के प्रमुख मेजर जनरल उबेदाल्लाह अल-मायता ने हमलावरों को 'तकफिरी' चरमपंथी बताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इन लोगों ने अकेले इस हमले को अंजाम दिया और इनका किसी संगठित समूह से कोई संबंध नहीं है।

गृह मंत्री माज़ेन अल-फराया ने भी इस बात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि जांच में विदेशी पक्षों के साथ किसी भी तरह के संपर्क या सहयोग के सबूत नहीं मिले हैं।

किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने इस हिंसा की कड़ी निंदा करते हुए इसे 'आतंकी हमला' करार दिया है। उन्होंने सुरक्षा बलों को निर्देश दिया है कि राष्ट्रीय एकता को खतरे में डालने वालों के खिलाफ 'लोहे की मुट्ठी' से कार्रवाई की जाए।

जॉर्डन ने पीड़ितों के सम्मान में तीन दिनों के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है। इस घटना के बाद सिंगापुर और दक्षिण अफ्रीका की सरकारों ने औपचारिक रूप से संवेदनाएं व्यक्त की हैं। जॉर्डन के कानून के तहत संदिग्धों को मौत की सजा हो सकती है, जबकि अधिकारी अब इस बात की जांच कर रहे हैं कि ये लोग चरमपंथी विचारधारा की ओर कैसे बढ़े।

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