जॉर्डन के विदेश मंत्री का कड़ा बयान, फलस्तीनी मुद्दे को देश पर थोपने की बात को बताया बेतुका.

Praggya Singh sabal24 September 20262 min read1 viewWorld
जॉर्डन के विदेश मंत्री का कड़ा बयान, फलस्तीनी मुद्दे को देश पर थोपने की बात को बताया बेतुका.

जॉर्डन के उप प्रधानमंत्री और विदेश मामलों के मंत्री Ayman Safadi ने इजराइल के उन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें फलस्तीनी मुद्दे को जॉर्डन की जमीन पर हल करने की बात कही गई थी। 24 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान इंटरनेशनल अलायंस फॉर द इम्प्लीमेंटेशन ऑफ द टू-स्टेट सॉल्यूशन की मंत्रिस्तरीय बैठक के बाद उन्होंने इन बयानों को पूरी तरह से बेतुका बताया। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी सोच लगातार जारी रहने वाली युद्ध की नीति को दर्शाती है। मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि फलस्तीनी संघर्ष को जॉर्डन के इलाके में ट्रांसफर करने का कोई भी प्रस्ताव किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा और देश इसे रोकने के लिए अपने पास मौजूद सभी तरीकों का इस्तेमाल करेगा।

अंतरराष्ट्रीय समुदाय की विफलता पर चिंता

इससे पहले 23 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क डिक्लेरेशन कॉन्फ्रेंस की पहली सालगिरह के मौके पर हुई बैठक में भी Ayman Safadi ने अपनी बात रखी थी। इस सम्मेलन की मेजबानी फ्रांस, ब्रिटेन, कनाडा और सऊदी अरब ने मिलकर की थी। बैठक में उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेही और असरदार रोकटोक न होने की वजह से इजराइल लगातार शांति की उम्मीदों को कमजोर कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो इससे पूरे इलाके में तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है।

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वेस्ट बैंक में बस्तियों का विस्तार और खतरा

जॉर्डन के विदेश मंत्री के भाषण का मुख्य केंद्र ऑक्यूपाइड वेस्ट बैंक में इजराइल द्वारा बस्तियों का लगातार विस्तार करना रहा। उन्होंने खास तौर पर प्रस्तावित E1 सेटलमेंट प्रोजेक्ट की कड़ी निंदा की। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर यह प्रोजेक्ट बनता है तो इससे वेस्ट बैंक का उत्तरी और दक्षिणी हिस्सा एक-दूसरे से कट जाएगा। ऐसा होने पर दो-देशीय समाधान यानी टू-स्टेट सॉल्यूशन के लिए जरूरी जमीनी जुड़ाव हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वे सिर्फ जुबानी जमाखर्च बंद करें और शांति योजना को बचाने के लिए जमीन पर ठोस कदम उठाएं।

धार्मिक स्थलों पर हमलों की चेतावनी

इसके अलावा Ayman Safadi ने इस्लामिक और ईसाई धर्म के पवित्र स्थलों पर लगातार हो रहे हमलों को लेकर भी कड़ी चेतावनी जारी की। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतों से एक बड़ा धार्मिक संघर्ष भड़क सकता है। न्यूयॉर्क में हुई इन बैठकों में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres, 29 देशों के प्रतिनिधियों और यूरोपीय संघ ने हिस्सा लिया। इन सभी ने गाजा की बिगड़ती मानवीय स्थिति और जमीन पर कब्जे को रोकने की जरूरत पर विस्तार से चर्चा की।

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