जॉर्डन पर ईरान का बड़ा हमला, एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में मार गिराईं 18 मिसाइलें.

मध्य पूर्व में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है और हाल ही में ईरान की तरफ से जॉर्डन के एयरस्पेस में एक बड़ा हमला किया गया है। 8 सितंबर 2026 को जॉर्डन की सेना ने आधिकारिक जानकारी दी कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान से दागी गईं 18 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नाकाम कर दिया। इस खतरनाक हमले से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है और आम लोगों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरान की तरफ से कुल 20 मिसाइलें भेजी गई थीं, जिनमें से दो मिसाइलें बिना आबादी वाले खाली इलाकों में आकर गिरीं। गनीमत यह रही कि इस घटना में किसी भी तरह के जानमाल का कोई नुकसान नहीं हुआ है और सभी लोग सुरक्षित हैं।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने ली हमले की जिम्मेदारी
ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने इस बात की जिम्मेदारी ली है कि यह पूरा हमला उन्होंने ही किया है। उनका दावा था कि उनका मुख्य निशाना जॉर्डन के पूर्वी शहर अल अज़राक में बना अमेरिकी मिलिट्री बेस था। ईरानी मीडिया के अनुसार इस हमले का मकसद उन जगहों को निशाना बनाना था जहाँ अमेरिकी सेना के फाइटर जेट्स जैसे F-35, F-16 और F-15 रखे हुए हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि ये मिसाइलें ईरान के 12 अलग-अलग शहरों से दागी गईं थीं, जो 'ऑपरेशन रोरिंग लायन' के खत्म होने के बाद से अब तक का सबसे बड़ा हमला माना जा रहा है।
अमेरिका और ईरान के बीच सीधी तनातनी
यह पूरी घटना अचानक नहीं हुई बल्कि इसके पीछे पिछले कुछ दिनों से चल रहा टकराव है। 8 सितंबर को ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने पुष्टि की थी कि अमेरिकी सेना ने ईरान के 5 क्रूड ऑयल टैंकरों को नष्ट कर दिया है। यह कार्रवाई तब की गई जब रिवोल्यूशनरी गार्ड ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत पर दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला करने की कोशिश की थी। हालांकि अमेरिकी जहाज ने समझदारी दिखाते हुए उन हमलों को नाकाम कर दिया और किसी भी अमेरिकी सैनिक को खरोंच तक नहीं आई। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी युद्धपोतों पर आगे भी हमले की कोशिश की गई, तो अमेरिकी सेना इसी तरह ईरानी तेल टैंकरों को अपना निशाना बनाती रहेगी। इसी दिन ईरान के खार्ग द्वीप के पास भी धमाके सुने जाने की खबरें सामने आईं थीं।
कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों पर मंडरा रहा है खतरा
हालाँकि ईरानी अधिकारियों का कहना था कि जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर हुए इन मिसाइल हमलों में भारी नुकसान हुआ है और कई लोग हताहत हुए हैं, लेकिन 9 सितंबर की सुबह तक जॉर्डन या अमेरिकी अधिकारियों में से किसी ने भी इस तरह के नुकसान की पुष्टि नहीं की थी। इसके साथ ही ईरान के IRGC ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों पर खड़े उन जहाजों को भी चेतावनी दी है जो अमेरिकी सेना या उनके लोगों को अपनी सेवाएं देते हैं। ईरान का कहना है कि ऐसे जहाज भविष्य के अभियानों में उनके निशाने पर रहेंगे, जिससे खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और कामगारों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।