अमेरिका में गरजा जॉर्डन, कहा इजराइल सरकार पूरा अरब क्षेत्र बर्बाद कर के मानेगी और आप लोग देखते रह जाएँगे.

Lov Singh22 September 20263 min read28 viewsWorld
अमेरिका में गरजा जॉर्डन, कहा इजराइल सरकार पूरा अरब क्षेत्र बर्बाद कर के मानेगी और आप लोग देखते रह जाएँगे.

न्यूयॉर्क: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA 2026) के मंच से जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला द्वितीय ने इज़राइल की नीतियों पर बेहद तीखा और सीधा हमला बोला है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इज़राइल की मौजूदा सरकार की "विस्तारवादी भूख" अब पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र के लिए एक गंभीर खतरा बन चुकी है।

किंग अब्दुल्ला का पूरा बयान

"इस इज़राइली सरकार की भूख अब क्षेत्रीय खतरे में तब्दील हो चुकी है। और आज, सीरिया इसकी चेतावनी है।"

"अंतरराष्ट्रीय समुदाय जानबूझकर यह नहीं देख रहा कि बार-बार की जा रही घुसपैठ, धीरे-धीरे बढ़ता क्षेत्रीय विस्तार, ज़मीन पर बनाई जा रही नई हकीकतें और चौकियां — यहां तक कि अहम जल संसाधनों के आसपास भी — क्या असर डाल रही हैं।"

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"कदम दर कदम, बेहद सोच-समझकर, इज़राइल यह परख रहा है कि वो कितनी दूर तक जा सकता है।"

"और हर बार जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय नज़रें फेर लेता है, इज़राइल यह सीखता है कि वो सीमाओं और कानूनी दायरों को पार करते हुए और भी आगे जा सकता है।"

सीरिया को क्यों बनाया मिसाल?

किंग अब्दुल्ला का यह बयान खासतौर पर दक्षिणी सीरिया में इज़राइल की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के संदर्भ में आया है। जॉर्डन, जिसकी सीमा सीधे सीरिया से मिलती है, लंबे समय से इस बात को लेकर चिंतित रहा है कि इज़राइल की तरफ से सीरियाई क्षेत्र में हो रही सैन्य कार्रवाइयां और ज़मीन पर बनाई जा रही नई "पोस्ट्स" (सैन्य चौकियां), सीधे तौर पर जॉर्डन की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती हैं — खासकर जब बात सीमा से सटे जल संसाधनों की हो।

गाज़ा, वेस्ट बैंक के बाद अब सीरिया भी निशाने पर

किंग अब्दुल्ला ने अपने भाषण में सिर्फ सीरिया तक सीमित नहीं रहे — उन्होंने साफ तौर पर इशारा किया कि यह पैटर्न गाज़ा और कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक में पहले से ही देखा जा चुका है, और अब यही रणनीति सीरिया में दोहराई जा रही है। जॉर्डन लंबे समय से इज़राइल की "ग्रेटर इज़राइल" (Greater Israel) की सोच को खारिज करता आया है, और वेस्ट बैंक में बस्तियों के विस्तार, खासकर विवादित "E1" क्षेत्र" को लेकर बार-बार कड़ी आपत्ति जता चुका है।

जॉर्डन की मुश्किल — शांति संधि भी, गुस्सा भी

गौर करने वाली बात यह है कि जॉर्डन और इज़राइल के बीच 1994 से एक शांति संधि लागू है, जो मिडिल ईस्ट की सबसे पुरानी और स्थिर द्विपक्षीय संधियों में से एक मानी जाती है। लेकिन इसके बावजूद, गाज़ा जंग शुरू होने के बाद से जॉर्डन में इज़राइल के खिलाफ जनाक्रोश लगातार बढ़ता रहा है, और किंग अब्दुल्ला पर घरेलू दबाव भी बना हुआ है। ऐसे में उनका यह बयान — शांति संधि बरकरार रखते हुए भी इतनी साफगोई से इज़राइल की आलोचना करना — जॉर्डन की उस नाज़ुक कूटनीतिक रस्सी पर चलने की कोशिश को दिखाता है, जिसमें वे न तो इज़राइल से रिश्ते पूरी तरह तोड़ना चाहते हैं, और न ही अपने अवाम की भावनाओं को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं।

"दुनिया की चुप्पी ही असली समस्या है"

किंग अब्दुल्ला के बयान का सबसे तीखा हिस्सा यही है — उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की खामोशी ही इज़राइल को हर बार और आगे बढ़ने का हौसला देती है। यह सीधा संदेश है दुनिया की बड़ी ताकतों के लिए — कि अगर अभी कड़ा रुख नहीं अपनाया गया, तो सीमाओं और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन आगे भी जारी रहेगा।

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