कराची: JPMC अस्पताल में वेतन संकट, तीन महीने से पैसे न मिलने पर डॉक्टरों का जोरदार प्रदर्शन

पाकिस्तान के कराची स्थित जिन्ना पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सेंटर (JPMC) में तनाव की स्थिति बनी हुई है। यहां के युवा डॉक्टरों ने पिछले तीन महीनों से वेतन न मिलने के कारण अस्पताल प्रशासन और सिंध सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। वेतन संकट से परेशान इन डॉक्टरों ने आउटपेशेंट डिपार्टमेंट (OPD) कॉम्प्लेक्स के बाहर जमा होकर जमकर नारेबाजी की और अपनी मांगों को पूरा करने की मांग की।
हैरानी की बात यह है कि वेतन न मिलने के बावजूद ये डॉक्टर मरीजों का इलाज करने और अपनी ड्यूटी निभाने में जुटे रहे, लेकिन जब उन्होंने अपने हक के पैसों के लिए अधिकारियों से संपर्क किया, तो उन्हें केवल जवाब घुमाया गया। डॉक्टरों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन उन्हें सिंध सरकार के पास भेज देता है और सरकार वापस उन्हें अस्पताल प्रशासन के हवाले कर देती है। इस खींचतान में युवा डॉक्टर बीच में फंस गए हैं।
नया पेमेंट सिस्टम बना मुसीबत का कारण
इस पूरे विवाद की जड़ मई महीने में सिंध सरकार द्वारा भुगतान प्रक्रिया में किया गया बदलाव बताया जा रहा है। पहले अस्पताल फंड प्राप्त करते थे और डॉक्टरों को चेक के जरिए भुगतान किया जाता था। लेकिन अब नई व्यवस्था के तहत वेतन सीधे डॉक्टरों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाना है। अधिकारियों का कहना है कि इस नई प्रक्रिया के लिए CNIC की कॉपियों और पुराने भुगतान की जानकारी जैसे अतिरिक्त दस्तावेजों की जरूरत थी, जिन्हें सिंध अकाउंटेंट जनरल (AG) कार्यालय में जमा करना था, जिससे देरी हुई।
सिंध यंग डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. शाहिद अवान ने चेतावनी दी है कि यदि अगले कुछ दिनों में बकाया वेतन जारी नहीं किया गया, तो विरोध प्रदर्शन को और तेज किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि आने वाले समय में प्रदर्शन अस्पताल के एडमिनिस्ट्रेशन ब्लॉक और आसपास की सड़कों तक फैल सकता है। वेतन के साथ-साथ डॉक्टरों ने अपनी सैलरी बढ़ाने की भी मांग की है, क्योंकि उनका दावा है कि साल 2020 के बाद से उनके वेतन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है।
दूसरी ओर, सिंध स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोपों को खारिज कर दिया है। विभाग ने एक बयान में कहा कि देरी का मुख्य कारण नए डायरेक्ट-पेमेंट सिस्टम को लागू करना और AG ऑफिस में वेंडर अकाउंट बनाने की प्रक्रिया है।