जिनेवा में उठा सिंध देश की आजादी का मुद्दा, संयुक्त राष्ट्र से निष्पक्ष जनसंग्रह की मांग.

जिनेवा में जेएएमएम के नेताओं ने शफ़ी बुरफत की अपील को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा है। नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में सिंध देश की स्वतंत्रता के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष जनमत संग्रह कराने की मांग की है। यह अपील जेएएमएम के चेयरमैन शफ़ी बुरफत के एक बयान के बाद सामने आई है, जिसमें सिंध की ऐतिहासिक पहचान और संस्कृति पर जोर दिया गया है।
सिंध की पहचान और संसाधनों पर खतरा
बयान में सिंध को सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़ा हुआ ऐतिहासिक वतन बताया गया है। नेताओं का कहना है कि सिंधी राष्ट्र एक अलग राष्ट्रीय पहचान रखता है लेकिन उसकी क्षेत्रीय अखंडता और जनसांख्यिकीय पहचान खतरे में है। बुरफत ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की नीतियां सिंध के राजनीतिक और आर्थिक वजूद को कमजोर करने का काम कर रही हैं। इसके अलावा सिंध के प्राकृतिक संसाधनों जैसे तेल, गैस, कोयला और कृषि भूमि को पंजाब भेजने का भी गंभीर आरोप लगाया गया है।
डेमोग्राफिक इंजीनियरिंग और मानवाधिकारों का मुद्दा
जेएएमएम के नेताओं ने आरोप लगाया कि सिंध के बड़े शहरों में बाहर के लोगों को बसाया जा रहा है ताकि स्थानीय लोगों को अल्पसंख्यक बनाया जा सके। इस प्रक्रिया को डेमोग्राफिक नरसंहार करार दिया गया है। साथ ही राजनीतिक गतिविधियों पर प्रतिबंध, कार्यकर्ताओं की गैरकानूनी हिरासत और जबरन गायब किए जाने के मामलों पर भी चिंता जताई गई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील
जेएएमएम के नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों से अपील की है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें। उन्होंने कहा कि इसे केवल पाकिस्तान का अंदरूनी मामला नहीं माना जाना चाहिए बल्कि यह एक ऐतिहासिक राष्ट्र के राजनीतिक अधिकारों और अस्तित्व का सवाल है।