कराची के सफारी पार्क में गंभीर रूप से बीमार अफ्रीकी हाथी मधुबाला का इलाज करने में जुटे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ
कराची के सफारी पार्क में गंभीर रूप से बीमार अफ्रीकी हाथी मधुबाला के इलाज के लिए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम जुटी है।

कराची: कराची के सफारी पार्क में रहने वाली 22 साल की अफ्रीकी हाथी मधुबाला की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। उसकी सेहत सुधारने के लिए अब अंतरराष्ट्रीय पशु विशेषज्ञों की टीम ने मोर्चा संभाल लिया है। एनिमल वेलफेयर संस्था फोर पॉज के डॉ. आमिर खलील और श्रीलंका के वाइल्डलाइफ डॉक्टर बुद्धिका बंदारा इस इलाज का नेतृत्व कर रहे हैं।
मधुबाला की सेहत में भारी गिरावट आई है और उसका वजन 200 किलोग्राम से ज्यादा कम हो गया है। उसके पिछले पैरों की मांसपेशियां काफी कमजोर हो गई हैं और नाखूनों पर गहरे जख्म हैं। हालत इतनी खराब है कि वह बार-बार गिर जाती है और उसे खड़ा करने के लिए क्रेन और हार्नेस का सहारा लेना पड़ता है।
विशेषज्ञों ने बताया कि पिछले टेस्ट में बैक्टीरिया और परजीवी संक्रमण अब खत्म हो गए हैं, लेकिन हाथी की शारीरिक कमजोरी अब भी चिंता का विषय है। अब उसके इलाज के लिए हाइड्रोथेरेपी का सहारा लिया जा रहा है। इसके लिए सफारी पार्क के स्विमिंग पूल के एक हिस्से को गहरा किया जाएगा ताकि मधुबाला बिना पूरा वजन डाले एक्सरसाइज कर सके।
डॉक्टरों ने मधुबाला की डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाने का फैसला किया है ताकि उसकी मांसपेशियों को रिकवरी में मदद मिले। विशेषज्ञों के मुताबिक, पार्क के फर्श का सख्त होना उसकी पैरों की समस्याओं का एक बड़ा कारण रहा है।
पार्क में रहने वाली दूसरी हाथी मलिका की तबीयत भी खराब है, हालांकि उसकी स्थिति मधुबाला जितनी गंभीर नहीं है। इन दोनों हाथियों में पहले ट्यूबरकुलोसिस पाया गया था, लेकिन मई 2026 तक के टेस्ट में वे नेगेटिव पाए गए हैं।
साल 2009 में तंजानिया से चार हाथियों को कराची लाया गया था। इनमें से नूरजहाँ की मौत अप्रैल 2023 में कराची चिड़ियाघर में हुई थी, जबकि सोनिया की मौत दिसंबर 2024 में सफारी पार्क में लंबी बीमारी और लापरवाही के कारण हुई थी। मधुबाला को नवंबर 2024 में सफारी पार्क शिफ्ट किया गया था।
सफारी पार्क का प्रबंधन करने वाले कराची मेट्रोपॉलिटन कॉरपोरेशन (KMC) ने अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी थी, क्योंकि स्थानीय डॉक्टर महीनों की जांच के बाद भी मधुबाला की बीमारी का सही कारण नहीं ढूंढ पाए थे। हाथियों की लगातार हो रही मौतों के बाद पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने इन जानवरों को कैद में रखने की प्रथा को बंद करने की मांग तेज कर दी है।