कराची में अनियंत्रित शहरीकरण की वजह से बढ़ा हीट आइलैंड का खतरा और बुनियादी सुविधाओं का संकट गहराया
कराची का निर्मित क्षेत्र 32% बढ़ा जिससे हरियाली घटी और हीट आइलैंड प्रभाव बढ़ा। बुनियादी ढांचे पर दबाव से बिजली-पानी का संकट गहराया।

कराची (पाकिस्तान): पाकिस्तान के शहर कराची में अनियंत्रित शहरीकरण की वजह से बुनियादी ढांचे और पर्यावरण पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। साल 2010 से 2025 के बीच शहर का निर्मित क्षेत्र लगभग 32 प्रतिशत बढ़ गया है, जिससे यह 1,400 वर्ग किलोमीटर से ज्यादा हो गया है।
स्पेस एंड अपर एटमॉसफेयर रिसर्च कमीशन (SUPARCO) के सैटेलाइट विश्लेषण के मुताबिक, कंक्रीट के बढ़ते जाल ने कृषि भूमि, चराई के मैदानों और खुले स्थानों को खत्म कर दिया है। इससे प्राकृतिक संसाधनों और जरूरी बुनियादी ढांचे पर दबाव बढ़ गया है।
सुपार्को ने बताया कि इमारतों और पक्की सतहों के विस्तार से 'अर्बन हीट आइलैंड' प्रभाव बढ़ रहा है। इससे जमीन की पानी सोखने की क्षमता कम हो गई है, जिससे भारी मानसून बारिश के दौरान बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (IBA) से जुड़े शहरी योजनाकार एम तोहीद के अनुसार, पिछले 15 वर्षों में कराची ने अपनी करीब 40 प्रतिशत हरियाली खो दी है। उन्होंने कहा कि कम वनस्पति और छाया के कारण उमस भरे मौसम में शरीर के लिए तापमान नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है, जिससे गर्मी से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
तोहीद ने यह भी बताया कि शहर की आबादी जिस तेजी से बढ़ी, बुनियादी ढांचा उस रफ्तार से विकसित नहीं हुआ। उन्होंने नॉर्थ कराची और लयारी जैसे इलाकों में बिजली की लंबी कटौती का जिक्र किया, जबकि बाबा भीत आइलैंड पर यह कटौती 18 घंटे तक पहुंच गई है।
बिजली और पानी की अनियमित आपूर्ति से न केवल आम लोगों का जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि व्यापार और दैनिक गतिविधियां भी बाधित हो रही हैं। इससे स्वास्थ्य खर्च बढ़ रहा है और मजदूरों की कार्यक्षमता में भी कमी आ रही है।
सुपार्को ने प्राकृतिक जल निकासी क्षमता में कमी को बाढ़ के खतरे से जोड़ा है। एजेंसी ने उदाहरण देते हुए बताया कि 2020 में कराची में आई विनाशकारी बाढ़ भारी बारिश और अपर्याप्त ड्रेनेज सिस्टम का ही नतीजा थी।