काठमांडू में चर्च की फंडिंग वाली संस्था में चल रहा था नवजात बच्चों को गोद लेने का अवैध धंधा

नेपाल की राजधानी काठमांडू से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। यहाँ चर्च की फंडिंग से चलने वाली एक संस्था 'भ्रूणका आवाजहरू' (Bhrunka Aawajharu) में नवजात बच्चों को अवैध तरीके से गोद देने का एक बड़ा नेटवर्क चलाया जा रहा था। आरोप है कि यहाँ 18 से 22 वर्ष की युवतियों को गर्भवती होने के लिए मजबूर किया जाता था और बाद में उनके बच्चों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के दूसरे परिवारों को सौंप दिया जाता था।
इस पूरे खेल का खुलासा तब हुआ जब गोदावरी नगरपालिका ने संस्था का निरीक्षण किया। जांच में यह बात सामने आई कि अमेरिकी संस्था 'लाइफ इंटरनेशनल', '10/40 कनेक्शन' और नेपाली चर्च समाज की आर्थिक मदद से चलने वाली इस संस्था में अनचाहे गर्भ वाली युवतियों को रखा जाता था। नियमों के मुताबिक, नेपाल में किसी बच्चे को गोद देने के लिए जिला अदालत की अनुमति अनिवार्य है, लेकिन यहाँ इस कानूनी प्रक्रिया को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
मां और बच्चे के बीच तोड़ा गया भावनात्मक रिश्ता
संस्था के कामकाज का तरीका बेहद खौफनाक था। जांच रिपोर्ट के अनुसार, गर्भवती युवतियों को शेल्टर होम में रखा जाता था और प्रसव के बाद मां और नवजात को तुरंत अलग कर दिया जाता था। इतना ही नहीं, मां और बच्चे के बीच भावनात्मक लगाव को रोकने के लिए बच्चे को जन्म के महज 7 से 10 दिनों के भीतर ही मां से दूर कर दिया जाता था। चौंकाने वाली बात यह है कि माताओं को हल्दी वाला पानी पिलाकर उनका दूध सुखाया जाता था और बच्चों को 'लैक्टोजिन' दिया जाता था।
संस्था की अध्यक्ष सुजन कुंवर और निदेशक सोनाम राई ने स्वीकार किया है कि बच्चों को दूसरे परिवारों को सौंपा गया, लेकिन उन्होंने कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। यह भी सामने आया कि यौन हिंसा का शिकार हुई लड़कियां भी यहाँ रही थीं, लेकिन संस्था ने अपराधियों को बचाने के लिए पुलिस को सूचना देने के बजाय मामले को गोपनीय रखा।
इस संस्था में अब तक करीब 27 गर्भवती किशोरियां रह चुकी हैं। बच्चों को अवैध तरीके से सौंपने के बाद उनके जन्म पंजीकरण भी नए परिवारों के नाम पर कराए जाते थे, ताकि कोई सबूत न रहे। फिलहाल यह पता लगाना बाकी है कि अब तक कुल कितने बच्चों का इस तरह अवैध हस्तांतरण किया गया है।