केन्या अपनी चावल उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए भारत की सिंचाई और प्रोसेसिंग तकनीकों को अपनाने की तैयारी में है
केन्या अपनी चावल उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आयात कम करने के लिए भारत की सिंचाई और प्रोसेसिंग तकनीकों को अपनाने की तैयारी में है।

नई दिल्ली: केन्या अपने देश में चावल के उत्पादन को बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए भारत के सिंचाई तौर-तरीकों, चावल की किस्मों और कृषि-प्रोसेसिंग मॉडल को अपनाने पर विचार कर रहा है। भारत इंटरनेशनल राइस कॉन्फ्रेंस 2026 के दौरान अधिकारियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने इस बात की जानकारी दी।
केन्याई सरकार के सीनियर इकोनॉमिस्ट स्टीफन न्यागा ने बताया कि उनका देश खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए चावल उत्पादन, सिंचाई विकास और कृषि उत्पादों में वैल्यू एडिशन के भारतीय अनुभव से सीखना चाहता है। उन्होंने कहा कि केन्या को भारत से बहुत कुछ सीखने को मिल सकता है।
न्यागा के मुताबिक, भारत की करीब 34 प्रतिशत जमीन सिंचित है, जबकि केन्या में यह आंकड़ा केवल 4-5 प्रतिशत है। केन्या अब अपने नेशनल इरिगेशन सेक्टर इन्वेस्टमेंट प्लान (NISIP) के तहत सिंचाई के दायरे को बढ़ाने पर काम कर रहा है।
आंकड़ों की बात करें तो केन्या हर साल लगभग 11 लाख मीट्रिक टन चावल की खपत करता है। इसमें से केवल 3 लाख मीट्रिक टन घरेलू स्तर पर पैदा होता है, जिसके कारण देश को करीब 7 लाख मीट्रिक टन चावल आयात करना पड़ता है।
केन्याई प्रतिनिधिमंडल ने भारत प्रवास के दौरान पंजाब एग्रो फूड सिस्टम का दौरा किया और वहां के चावल प्रोसेसिंग मॉडल का अध्ययन किया। न्यागा ने बताया कि उन्होंने सीखा कि कैसे टूटे हुए चावल को पशु आहार में बदला जा सकता है और चावल से निकलने वाले अन्य उप-उत्पादों का उपयोग किया जा सकता है। वे इसी मॉडल को केन्या में लागू करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि केन्या जल संचयन, भंडारण, सिंचाई विकास और चावल की खेती में भारत के अनुभव का लाभ उठा सकता है। साथ ही, भारतीय चावल की किस्मों को अपनाने और कृषि वैल्यू चेन को सुधारने के मौके भी तलाशे जा रहे हैं।
वहीं ओमान की ओल्ड बाजार बिजनेस LLC के सीईओ सलीम अल-सियाबी ने कहा कि भारत ओमान के लिए चावल का एक प्रमुख और भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता बना हुआ है। उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी पिछले 10 साल से चावल आयात कर रही है और ओमान के लिए भारत सबसे बड़ा सप्लायर है।
अल-सियाबी के अनुसार, वैश्विक शिपिंग चुनौतियों के बीच विश्वसनीय निर्यात व्यवस्था बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सम्मेलन खरीदारों, व्यापारियों और निर्यातकों को जुड़ने और व्यापार के नए अवसर तलाशने का मौका देते हैं।