सऊदी अरब पर हुए ड्रोन और मिसाइल हमलों की केन्या ने की कड़ी निंदा, जताई चिंता.

केन्या सरकार ने सऊदी अरब के विभिन्न इलाकों पर लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों को लेकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। 18 सितंबर 2026 को केन्या के विदेश और डायस्पोरा मामलों के मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए इन हमलों को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों के खिलाफ बताया है। केन्याई सरकार ने कहा कि इस तरह की कार्यवाहियों से न केवल क्षेत्रीय शांति खतरे में पड़ती है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत सुरक्षित देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का भी उल्लंघन होता है। सऊदी अरब की सुरक्षा को लेकर केन्या ने पूरी एकजुटता दिखाई है।
प्रवासियों और पवित्र स्थलों की सुरक्षा पर चिंता
सऊदी अरब में रहने वाले नागरिकों, पवित्र मस्जिदों और तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को लेकर केन्याई अधिकारियों ने खास तौर पर चिंता व्यक्त की है। इस देश में बड़ी संख्या में केन्या के लोग भी रहते हैं जो वहां नौकरी और काम-धंधा करते हैं। बिगड़ते सुरक्षा हालात को देखते हुए वहां के प्रवासी नागरिकों की सुरक्षा और भलाई को लेकर केन्या सरकार ने गहरी चिंता जताई है। केन्या ने सभी पक्षों से अपील की है कि वे तुरंत सैन्य कार्रवाइयों को रोकें और स्थिति को शांत करने के लिए संयम से काम लें।
हाल ही में हुए हमलों और बुनियादी ढांचे पर असर
यह निंदा ऐसे समय में आई है जब क्षेत्रीय संघर्ष काफी बढ़ चुका है। हाल ही के दिनों में सऊदी अरब के कई शहरों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचों को निशाना बनाया गया है। 10 और 11 सितंबर 2026 को हुई ऐसी ही घटनाओं के कारण ईस्ट-वेस्ट क्रूड ऑयल पाइपलाइन को अस्थाई तौर पर बंद करना पड़ा था। इसके अलावा, सऊदी अधिकारियों ने मक्का के पास एक ड्रोन हमले की कोशिश को विफल करने की बात कही थी। ताइफ प्रांत में एक गिराए गए ड्रोन के मलबे की वजह से एक व्यक्ति की मौत हो गई थी और दो लोग घायल हो गए थे, जिससे आम लोगों की जिंदगी पर मंडराता खतरा साफ नजर आया.
अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का पालन
केन्या ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पूरी तरह से पालन करने और यमन से जुड़े संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों को लागू करने पर जोर दिया है, जिसमें हथियारों की पाबंदी से जुड़े नियम भी शामिल हैं। सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के सहयोग से यमन के राजनीतिक समाधान का समर्थन किया है, जिसे शांति का एकमात्र रास्ता बताया गया है। इसके साथ ही, लाल सागर और बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य में समुद्री सुरक्षा को लेकर भी केन्या ने चेतावनी दी है कि कमर्शियल जहाजों के रास्तों में रुकावट आने से दुनिया की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर बुरा असर पड़ सकता है।