Saudi Arabia Sadat Salim Death: सऊदी अरब में केरल के प्रवासी की दिल का दौरा पड़ने से मौत.

सऊदी अरब के दम्माम शहर से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है जहाँ केरल के रहने वाले एक भारतीय प्रवासी की अचानक दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। मरने वाले व्यक्ति की पहचान 40 साल के Sadat Salim के रूप में हुई है जो मूल रूप से भारत के केरल राज्य के कोल्लम जिले के रहने वाले थे। यह दर्दनाक घटना 22 सितंबर 2026 की सुबह को हुई जब वे अपने काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे। सादत सलीम अल खोबर की एक प्राइवेट फर्म में सीनियर अकाउंटेंट के पद पर काम कर रहे थे और अपने परिवार के साथ वहां रह रहे थे। इस अचानक हुई घटना से उनके परिवार और प्रवासी समुदाय में गहरा शोक फैल गया है।
केरल से दो दिन पहले ही लौटे थे सऊदी
सादत सलीम ओचुरा के पास केक्लाप्पना के रहने वाले थे। वे अपनी छुट्टी केरल में बिताने के बाद अपनी पत्नी Rabia और अपनी तीन साल से ज्यादा उम्र की बेटी Aysa Mariyam के साथ केवल दो दिन पहले ही सऊदी अरब वापस लौटे थे। किसी को यह अंदाजा नहीं था कि खुशियों के साथ सऊदी लौटे इस परिवार पर इतनी बड़ी मुसीबत आ जाएगी। उनके माता-पिता Salim और Mehrunisa हैं जो केरल में ही रहते हैं और बेटे की अचानक मौत की खबर सुनकर उनका रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार के लोग और रिश्तेदार इस गम से उबर नहीं पा रहे हैं।
कानूनी प्रक्रिया और पार्थिव शरीर को भारत भेजने की तैयारी
स्थानीय अधिकारी और भारतीय दूतावास मिलकर सादत सलीम के शव को भारत वापस भेजने यानी रिपैट्रिएशन के लिए जरूरी कानूनी और प्रशासनिक कागजी कार्रवाई को पूरा करने में जुटे हुए हैं। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उनके पार्थिव शरीर को उनके गृह राज्य केरल लाया जाएगा जहाँ केक्लाप्पना जुमा-अथ कब्रिस्तान में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। रियाद स्थित भारतीय दूतावास के नियमों के अनुसार दिल का दौरा पड़ने से होने वाली मौतों को नेचुरल डेथ यानी प्राकृतिक मौत माना जाता है। इस प्रक्रिया में स्थानीय पुलिस, भारतीय मिशन और मरने वाले के करीबी रिश्तेदारों को तुरंत जानकारी दी जानी होती है।
दूतावास के नियम और दस्तावेज
भारत में शव को वापस भेजने के लिए परिवार को कुछ जरूरी दस्तावेज तैयार करने होते हैं। इसमें एक नोटरीकृत पावर ऑफ ATTORNEY, मृतक का पासपोर्ट, इकामा की कॉपी, मेडिकल रिपोर्ट और बकाया राशि और परिवहन खर्च को लेकर नियोक्ता यानी स्पॉन्सर की तरफ से एक अंडरटेकिंग शामिल होती है। दूतावास के दिशा-निर्देशों के अनुसार आमतौर पर दफनाने या शव को भेजने का खर्च स्पॉन्सर को ही उठाना पड़ता है, जब तक कि वह GOSI बीमा के तहत कवर न हो। इसके अलावा, बचा हुआ वेतन और नौकरी खत्म होने पर मिलने वाले अन्य बकाये का हिसाब करना भी अनिवार्य होता है। प्राकृतिक मौत के मामलों में शव को वापस भेजने में आम तौर पर दो से तीन सप्ताह का समय लग जाता है, जो प्रशासनिक मंजूरी और फ्लाइट मिलने पर निर्भर करता है। किसी भी तरह की आपातकालीन सहायता के लिए रियाद में भारतीय दूतावास की 24/7 सेवा उपलब्ध है, जिस पर टोल-फ्री नंबर 8002471234, लैंडलाइन +966-11-4884697 या फिर व्हाट्सएप नंबर +966-542126748 के जरिए संपर्क किया जा सकता है।