केरल हाईकोर्ट का NORKA को आदेश: खाड़ी प्रवासियों के लिए बढ़ा प्रीमियम घटेगा?
केरल हाईकोर्ट ने खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के NORKA केयर इंश्योरेंस प्रीमियम में 233% की बढ़ोतरी की समीक्षा करने का आदेश दिया है।

कोच्चि: केरल हाईकोर्ट ने खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों के लिए NORKA केयर इंश्योरेंस प्रीमियम में की गई भारी बढ़ोतरी पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने नॉन-रेसिडेंट केरलाइट्स अफेयर्स (NORKA) विभाग को इस प्रीमियम वृद्धि की समीक्षा करने का आदेश दिया है।
शुक्रवार, 7 नवंबर 2026 को दिए गए इस आदेश के मुताबिक, विभाग को याचिकाकर्ताओं और प्रभावित पक्षों की बात सुननी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि फैसले की प्रमाणित कॉपी मिलने के छह हफ्ते के भीतर इस मामले में औपचारिक निर्णय लेना होगा।
यह आदेश प्रवासी लीगल सेल (PLC) और लाभार्थी मुस्तफा थोंडियिल व अब्दुल हकीम केके द्वारा दायर एक रिट याचिका (W.P.(C) No. 38075 of 2026) पर आया है। PLC, जिसकी शाखाएं यूएई, ओमान, बहरीन, कतर और सऊदी अरब में हैं, ने अचानक की गई इस रेट एडजस्टमेंट की वैधता को चुनौती दी थी।
1 नवंबर 2026 से लागू नई आयु-आधारित प्रणाली के तहत प्रीमियम की दरों में बड़ा उछाल आया है। पहले 5 लाख रुपये के स्वास्थ्य कवर के लिए फ्लैट रेट 13,411 रुपये था। अब 51-60 वर्ष की आयु वालों के लिए यह प्रीमियम 35,664 रुपये और 61-70 वर्ष वालों के लिए 44,718 रुपये हो गया है, जो कि 233% की वृद्धि है। वहीं, 71-80 वर्ष के आयु वर्ग के लिए यह राशि 77,773 रुपये तक पहुंच गई है।
प्रीमियम बढ़ने के साथ-साथ अस्पताल से छुट्टी के बाद मिलने वाले कवरेज (post-hospitalisation coverage) को भी 60 दिनों से घटाकर 30 दिन कर दिया गया है। इन संशोधित दरों की अधिसूचना 28 अक्टूबर को जारी की गई थी, जबकि पुरानी पॉलिसी 31 अक्टूबर को समाप्त होनी थी।
PLC दुबई के अध्यक्ष टीएन कृष्णकुमार ने नई योजना के ढांचे की आलोचना करते हुए कहा कि इसका मध्यम आयु वर्ग और वरिष्ठ प्रवासियों पर बुरा असर पड़ेगा। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री वी डी सथीसन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने तर्क दिया कि यह बदलाव जरूरी था। सरकार के मुताबिक, कैंसर और गंभीर बीमारियों के कारण दावों की राशि 210 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जबकि प्रीमियम संग्रह केवल 145 करोड़ रुपये था।
विपक्ष के नेताओं, जिनमें पिनाराई विजयन शामिल हैं, ने इस नीति को पूरी तरह वापस लेने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे खाड़ी देशों में काम करने वाले श्रमिकों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।