कराची यूनिवर्सिटी के छात्र खलील बलोच की गुमशुदगी पर बलोच विमेन फोरम ने की रिहाई की मांग
बलोच विमेन फोरम ने कराची यूनिवर्सिटी के छात्र खलील बलोच की जबरन गुमशुदगी की निंदा करते हुए उनकी रिहाई की मांग की है।

बलोचिस्तान (पाकिस्तान): कराची यूनिवर्सिटी के एमफिल छात्र खलील बलोच की कथित तौर पर जबरन गुमशुदगी को लेकर विवाद बढ़ गया है। बलोच विमेन फोरम की आयोजक शली बलोच ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे शिक्षित बलोच युवाओं और छात्रों के खिलाफ दमन का एक और उदाहरण बताया है।
शली बलोच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर बताया कि बलोचिस्तान के अवरान निवासी खलील को 4 अगस्त 2026 को यूनिवर्सिटी के प्रशासन ब्लॉक के बाहर से सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर जबरन गायब कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि तीन महीने बीत जाने के बाद भी परिवार को कोई जवाब नहीं मिला है और वे अनिश्चितता और मानसिक पीड़ा से गुजर रहे हैं।
इस घटना को बलोच छात्रों की असुरक्षा से जोड़ते हुए शली बलोच ने आरोप लगाया कि बलोच आबादी को नियंत्रित करने के लिए जबरन गुमशुदगी, डराने-धमकाने और सामूहिक सजा जैसे हथियारों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, ये तरीके औपनिवेशिक दौर की याद दिलाते हैं, जिनका मकसद बौद्धिक स्वतंत्रता को दबाना और लोगों की आकांक्षाओं को खत्म करना है।
उन्होंने आगे कहा कि बेहतर भविष्य के लिए पढ़ाई कर रहे छात्रों को निशाना बनाने से पूरी पीढ़ी के बीच डर का माहौल पैदा हो रहा है। शली बलोच ने अधिकारियों से मांग की है कि खलील के ठिकाने का तुरंत खुलासा किया जाए और उन्हें बिना शर्त सुरक्षित रिहा किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि अगर खलील पर कोई आरोप हैं, तो उन्हें सक्षम अदालत में पेश किया जाए और कानूनी प्रक्रिया का पालन हो।
बलोच विमेन फोरम ने बलोच छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जवाबदेही तय करने की मांग की है। शली बलोच ने जोर देकर कहा कि शिक्षा हासिल करने के कारण छात्रों को सजा नहीं मिलनी चाहिए और इस तरह की मनमानी को तुरंत बंद किया जाना चाहिए।
पाकिस्तान के बलोचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में जबरन गुमशुदगी और एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसे संगठनों ने सुरक्षा एजेंसियों द्वारा बिना कानूनी प्रक्रिया के कार्यकर्ताओं और छात्रों को उठाए जाने पर चिंता जताई है। कई मामलों में लापता लोगों के परिवार विरोध प्रदर्शन करते हैं और मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि कई पीड़ित बाद में मृत पाए जाते हैं, हालांकि अधिकारी इसमें अपनी संलिप्तता से इनकार करते हैं।