पूर्व अमेरिकी दूत ज़लमय ख़लीलज़ाद का बड़ा बयान, कहा आतंकवाद के खिलाफ जंग का दौर हुआ खत्म

Nura Basta12 September 20263 min read17 viewsWorld
पूर्व अमेरिकी दूत ज़लमय ख़लीलज़ाद का बड़ा बयान, कहा आतंकवाद के खिलाफ जंग का दौर हुआ खत्म

अमेरिका के पूर्व राजनयिक ज़लमय ख़लीलज़ाद ने अपनी हालिया टिप्पणी में अमेरिका की विदेश नीति को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ जंग का पुराना दौर अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है और अमेरिका को अपनी रणनीति में बदलाव करने की बहुत जरूरत है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर सुरक्षा के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और दुनिया भर के देश नई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। आम लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि अमेरिका की नीतियों में आने वाले इस बदलाव का असर दुनिया के दूसरे हिस्सों पर भी पड़ सकता है।

अमेरिका को चीन और रूस पर ध्यान देने की जरूरत

ज़लमय ख़लीलज़ाद ने 12 सितंबर 2026 को अपने एक संबोधन में स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य हित यह सुनिश्चित करना है कि अफगानिस्तान कभी भी अमेरिका विरोधी आतंकवादी संगठनों का अड्डा न बने। उन्होंने साल 2003 से 2005 तक अफगानिस्तान में अमेरिकी राजदूत के रूप में और बाद में 2018 से 2021 तक अफगानिस्तान सुलह के लिए विशेष प्रतिनिधि के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। उनके अनुसार, अब समय आ गया है कि अमेरिका अपनी ताकत को चीन, जो दुनिया पर अपना प्रभाव बढ़ाना चाहता है, और रूस का मुकाबला करने में लगाए। उन्होंने चेतावनी दी कि पुराने संघर्षों पर ही ध्यान केंद्रित रखने से देश भविष्य के बड़े खतरों को नजरअंदाज कर सकता है।

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तालिबान की कार्यशैली और इतिहास की गलतियों पर चर्चा

तालिबान के बारे में बात करते हुए ज़लमय ख़लीलज़ाद ने दावा किया कि वे अमेरिकी हितों से जुड़े आतंकवाद से निपटने में उम्मीद से ज्यादा असरदार साबित हुए हैं। उन्होंने यह भी माना कि 9/11 के हमलों के बाद की सबसे बड़ी गलती यह थी कि अमेरिका ने शुरुआती दौर में तालिबान के साथ बातचीत करने से इनकार कर दिया था। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अमेरिका ने उस शुरुआती आतंकवादी खतरे को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया था जिसके कारण उनकी सेना को अफगानिस्तान में उतरना पड़ा था। अमेरिकी विदेश विभाग ने 10 सितंबर 2026 को यह साफ किया था कि ज़लमय ख़लीलज़ाद अब एक निजी नागरिक हैं और वे किसी भी सरकारी पद पर नहीं हैं। विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि तालिबान अधिकारियों के साथ ऊर्जा सौदे को लेकर हुई उनकी हालिया बैठकों से अमेरिकी प्रशासन का कोई लेना-देना नहीं है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा को लेकर अभी भी चिंताएं बरकरार

भले ही ज़लमय ख़लीलज़ाद ने अपने विचार रखे हों, लेकिन दुनिया भर में अफगानिस्तान की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं कम नहीं हुई हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने 11 सितंबर 2026 को इस बात पर गहरी चिंता जताई कि देश के भीतर अभी भी ISIL-K और TTP जैसे खतरनाक संगठन मौजूद हैं। इसके अलावा, काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के विशेषज्ञों ने भी 12 सितंबर 2026 को यह सवाल उठाया कि क्या अफगानिस्तान एक बार फिर से पश्चिमी देशों पर हमले की साजिश रचने के लिए एक ऐसा क्षेत्र बन सकता है जिस पर किसी का नियंत्रण न हो। इन तमाम बातों से साफ पता चलता है कि क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय सतर्क है और आने वाले दिनों में इस पर कड़ी नजर रखी जाएगी।

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