जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय ने UN में इस्राइल पर बोला हमला, कहा फलस्तीन पर कब्जा खतरनाक खतरा है.

न्यूयॉर्क में आयोजित 81st United Nations General Assembly के दौरान जॉर्डन के राजा King Abdullah II ने इस्राइली नीतियों पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर जोर दिया कि इस्राइल लगातार फलस्तीनी राष्ट्र के गठन के विरोध को बनाए रखे हुए है और पीछे हटने का कोई संकेत नहीं दे रहा है। राजा ने उस सोच को एक खतरनाक भ्रम करार दिया जिसमें यह माना जाता रहा है कि अरब जगत ने कभी शांति की तलाश नहीं की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस्राइल की मौजूदा नीतियां और उसकी विस्तारवादी सोच पूरे क्षेत्र के लिए एक बड़ा संकट बन चुकी हैं।
गाजा और वेस्ट बैंक पर बड़ा बयान
जॉर्डन के राजा ने अपने भाषण में गाजा में हुई भारी तबाही और वेस्ट बैंक में जमीन के अधिग्रहण का जिक्र करते हुए इसे फलस्तीनी पहचान को मिटाने की एक सोची-समझी साजिश बताया। उन्होंने कहा कि इन कार्रवाइयों का मकसद किसी भी संप्रभु राष्ट्र के गठन को पूरी तरह असंभव बनाना है। वेस्ट बैंक में लोगों को उनके घरों से जबरन बेदखल करने की घटना को उन्होंने forced displacement यानी जबरन विस्थापन करार दिया और इसे एक गंभीर युद्ध अपराध बताया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गाजा और वेस्ट बैंक को अलग-अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि दोनों ही एक ही इस्राइली रणनीति के दो अलग मोर्चे हैं।
मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी
घटनाक्रम के दौरान हुए मानवीय नुकसान का जिक्र करते हुए राजा ने बताया कि अमरीका समर्थित संघर्षविराम समझौते के बाद के 300 दिनों में लगभग 300 फलस्तीनी बच्चों की जान चली गई। इसके अलावा गाजा में जॉर्डन के फील्ड अस्पतालों को भी निशाना बनाया गया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की आलोचना करते हुए कहा कि दुनिया के देशों ने इस संघर्ष को सुलझाने के बजाय केवल इसे संभालना चुना है। नतीजतन बिना किसी रोकटोक और डर के इस्राइल अपनी कार्रवाई जारी रखे हुए है और क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ गई है।
जॉर्डन की दो-राज्य समाधान पर प्रतिबद्धता
अपने भाषण से पहले King Abdullah II ने अमेरिकी सीनेटर Jeanne Shaheen और प्रतिनिधि Joe Wilson से मुलाकात की थी। इस बैठक में उन्होंने जॉर्डन की उस पक्की स्थिति को दोहराया जिसमें इस्राइल की ओर से सैन्य नियंत्रण और बस्तियों के विस्तार की योजनाओं का विरोध किया जाता है। राजा ने कहा कि क्षेत्र में सभी पक्षों के लिए असली सुरक्षा तभी संभव है जब एक स्वतंत्र फलस्तीनी राष्ट्र के अधिकार को बिना किसी शर्त के स्वीकार किया जाए। जॉर्डन इसके लिए अपनी पुरानी मांग पर कायम है जिसके तहत 4 June 1967 की सीमाओं के आधार पर पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाकर एक स्वतंत्र फलस्तीनी राज्य का निर्माण होना चाहिए।