किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने जारी की एडवाइजरी, उड़ान भरने से पहले एयरलाइंस से संपर्क करें

रियाद के किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट (RUH) ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को यात्रियों के लिए एक जरूरी चेतावनी जारी की है। एयरपोर्ट प्रशासन ने सभी मुसाफिरों को सलाह दी है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी संबंधित एयरलाइंस से संपर्क करें और अपनी फ्लाइट की स्थिति की पुष्टि जरूर कर लें। यह कदम हूती विद्रोहियों द्वारा 6 और 7 अक्टूबर को किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद उठाया गया है, जिन्होंने किंग खालिद और आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट दोनों को निशाना बनाया था।
इन हमलों का असर काफी गंभीर रहा है। किंग खालिद इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हमले में एक सूडानी नागरिक की जान चली गई, जबकि आठ अन्य लोग घायल हुए हैं। घायलों में पांच सऊदी नागरिक, दो मिस्र के नागरिक और एक पाकिस्तानी नागरिक शामिल हैं। सुरक्षा कारणों से बुधवार सुबह उड़ान संचालन एक घंटे से अधिक समय के लिए निलंबित कर दिया गया था।
उड़ानों पर पड़ा असर और भारी नुकसान
हमलों के बाद एयरपोर्ट के कामकाज में भारी व्यवधान देखा गया। 8 अक्टूबर के आंकड़ों के अनुसार, 11 उड़ानें रद्द कर दी गईं और 58 उड़ानें देरी से चलीं। एयरपोर्ट का व्यवधान सूचकांक (disruption index) 5 में से 4.2 दर्ज किया गया है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है। इसके अलावा, एयरपोर्ट की आधिकारिक वेबसाइट लगातार दूसरे दिन बंद रही, जिससे यात्रियों को काफी परेशानी हुई।
इसी तरह, आभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (AHB) पर हुए हमलों में मोरक्को और अल्जीरिया के एक-एक नागरिक की मौत हो गई और 28 लोग घायल हुए। सऊदी जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन (GACA) ने इन हताहतों और दोनों हवाई अड्डों पर हुए भौतिक नुकसान की आधिकारिक पुष्टि की है।
इस तनावपूर्ण माहौल के बीच, रियाद में अमेरिकी दूतास्फीति ने भी एक सुरक्षा अलर्ट जारी कर अमेरिकी नागरिकों को उड़ानों के रद्द होने और हवाई क्षेत्र बंद होने की संभावना के प्रति आगाह किया है। दूसरी ओर, हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारे ने अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस को चेतावनी दी है कि वे सऊदी हवाई क्षेत्र से बचें, केवल मक्का और मदीना जाने वाले रास्तों को छोड़कर, क्योंकि उन्होंने इसे 'सक्रिय युद्ध क्षेत्र' घोषित किया है।
इस सुरक्षा संकट के कारण फिलिपीन एयरलाइंस जैसी बड़ी कंपनियों ने अपनी उड़ानें रद्द की हैं, जबकि सऊदी अरब की राष्ट्रीय एयरलाइन 'सऊदिया' को भी परिचालन में भारी देरी का सामना करना पड़ा है।