अमेरिका में भागवताचार्य कृष्णचन्द्र शास्त्री ने समझाई ईश्वरीय भक्ति, कहा आनंद ही सर्वोच्च मार्ग है

Nura Basta8 September 20262 min read47 viewsIndia
अमेरिका में भागवताचार्य कृष्णचन्द्र शास्त्री ने समझाई ईश्वरीय भक्ति, कहा आनंद ही सर्वोच्च मार्ग है

अमेरिका के लॉस एंजिल्स में चल रही भागवत कथा के दौरान भारत के प्रसिद्ध कथावाचक ठाकुर पंडित कृष्णचन्द्र शास्त्री ने ईश्वरीय भक्ति का गहरा मर्म समझाया है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जीवन में आनंद ही सर्वोच्च ईश्वरीय भक्ति है और इसका कोई दूसरा विकल्प नहीं मिल सकता है। कनाडा और अमेरिका के एक महीने के लंबे दौरे पर पहुंचे शास्त्री इन दिनों विदेशों में रह रहे सनातनियों को धर्म और अध्यात्म से जोड़ने का काम कर रहे हैं। भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में लोग उनकी कथा सुनने के लिए पहुंच रहे हैं।

विदेशों में बढ़ रही है भारतीय संस्कृति की अलख

अमेरिका और कनाडा में इन दिनों कथावाचकों की सभाओं में हजारों और लाखों की संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं। प्रवासी भारतीय इन आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं और धर्म से जुड़े विभिन्न प्रश्नों पर मनन कर रहे हैं। चार सितंबर को न्यू जर्सी के एक विशाल वेद मंदिर में भी हजारों लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली थी। इसके अलावा उन्होंने बिहार के आरा जिले का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी कथा के दौरान लाखों लोगों की उपस्थिति यह बताती है कि लोग अपनी संस्कृति से कितना जुड़ाव महसूस करते हैं।

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पासाडेना हिंदू मंदिर में गूंजे संकीर्तन

कनाडा और अमेरिका की तीस दिवसीय यात्रा के अपने दूसरे पड़ाव के तहत ठाकुर कृष्णचंद्र लॉस एंजिल्स के पासाडेना हिंदू मंदिर पहुंचे थे। यहां दिनभर तेज बरसात होने के बावजूद सैकड़ों सनातनी मंदिर परिसर में मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत ‘राधे राधे, गोविंद राधे’ के संकीर्तन के साथ की गई। इस दौरान भारतीय पारंपरिक परिधान में सजी 21 महिलाओं ने भव्य कलश यात्रा निकाली जिसकी अगुवाई खुद ठाकुर कृष्णचंद्र ने की। मंदिर के पदाधिकारियों और पुजारियों ने उनका स्वागत करते हुए आरती उतारी। साथ ही उन्होंने निर्माणाधीन पासाडेना हिंदू मंदिर के निर्माण कार्य में अधिक से अधिक सहयोग देने की अपील भी की।

पापों से बचने और सात्विक जीवन की सलाह

कथा के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि खानपान और तरह-तरह के व्यंजनों का स्वाद केवल जीभ की संतुष्टि मात्र है, जबकि परमात्मा हर जगह मौजूद हैं। मनुष्य को अपने मन, वचन और कर्म से किसी भी तरह के पाप से बचना चाहिए क्योंकि पाप की सजा से बच पाना बेहद कठिन होता है। उन्होंने बताया कि भगवान सत्, चित और आनंद का रूप हैं जो सर्वत्र व्याप्त हैं और निर्गुण होने के साथ-साथ सगुण भी हैं। अपने 52 साल के कथा यात्रा के अनुभव में उन्होंने देश-विदेश में अब तक 1600 भागवत कथाएं पूरी की हैं और पिछले तीन दशकों से लगातार अमेरिका तथा कनाडा में धर्म का प्रचार कर रहे हैं।

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