Kuwait Airport Case: कुवैत एयरपोर्ट पर पकड़े गए शख्स से खुला राज, 37 लोगों की नागरिकता हुई रद्द

कुवैत में नागरिकता को लेकर एक बहुत बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसके बाद सरकार ने सख्त कदम उठाया है। Kuwait City में एयरपोर्ट पर एक रूटीन चेकिंग के दौरान अधिकारियों ने एक ऐसे शख्स को पकड़ा जो देश छोड़कर जाने की कोशिश कर रहा था। पूछताछ के दौरान उसने चौंकाने वाला खुलासा किया और बताया कि सरकारी कागजों में उसके चाचा को उसका पिता बताकर दर्ज किया गया था। इस एक मामले के सामने आते ही प्रशासन हरकत में आया और जांच का दायरा बढ़ा दिया गया। जांच के बाद कुल 37 individuals की कुवैती नागरिकता को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है।
कैसे खुला नागरिकता फर्जीवाड़े का पूरा राज
जांच के दौरान अधिकारियों को पता चला कि पकड़े गए व्यक्ति के पास एक और गल्फ देश की नागरिकता भी थी। इसके बाद उस पूरे परिवार के दस्तावेजों की गहराई से जांच शुरू की गई। जिस व्यक्ति को उसका पिता बताया गया था, उसका जन्म 1953 में हुआ था और उसने साल 1973 में कुवैती नागरिकता हासिल की थी। वह भी एक अलग गल्फ पहचान रखता था और साल 2024 में कुवैत छोड़कर जा चुका था। जब कागजों की छानबीन हुई तो पता चला कि उस शख्स के परिवार में रजिस्टर्ड चौदह बच्चों में से दो बच्चे असल में उस व्यक्ति के नहीं बल्कि उसके भाइयों के बेटे थे, जिसमें एयरपोर्ट पर पकड़ा गया शख्स और 1992 में जन्मा एक अन्य व्यक्ति भी शामिल था।
DNA टेस्ट से साबित हुई परिवार के रिश्तों की सच्चाई
खून के रिश्तों की इस गड़बड़ी को पूरी तरह से साबित करने के लिए अधिकारियों ने डीएनए टेस्ट का सहारा लिया। इसके लिए उस परिवार के दादाजी के डीएनए सैंपल का इस्तेमाल किया गया जो फॉरेसिक डिपार्टमेंट में साल 2012 में हुए एक अन्य मामले के दौरान सुरक्षित रखे गए थे। जब इन Genetic Samples की लैब में जांच की गई तो सारे फर्जी दस्तावेज और रिश्ते बेनकाब हो गए। इसी डीएनए रिपोर्ट के आधार पर कुवैत सरकार ने बड़ा फैसला लिया और आरोपी शख्स तथा उसके रिश्तेदारों समेत कुल 37 लोगों की नागरिकता छीन ली। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में अधिकारियों की नजर सौ से ज्यादा अन्य नामों पर भी है, हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी सिर्फ 37 लोगों की नागरिकता रद्द करने की पुष्टि हुई है और बाकी फाइलों की जांच अभी भी जारी है।
प्रवासियों और प्रभावित लोगों के लिए नया नियम
कुवैत सरकार द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम के बाद उन लोगों के लिए भी नियम स्पष्ट किए गए हैं जो इस कार्रवाई की चपेट में आए हैं। Ministerial Decision 1410/2026 के तहत जिन प्रभावित लोगों के पास किसी दूसरे देश की नागरिकता है, वे अब देश में रहने के लिए अधिकतम 10 years तक के रेगुलर रेजिडेंस परमिट के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि यह परमिट कुछ खास काम करने की शर्तों और प्रशासनिक स्थिति में बदलाव के नियमों के अधीन होगा। कुवैत की कुल आबादी इस साल जून तक लगभग 5.31 million तक पहुंच चुकी है, जिसमें भारतीय प्रवासी सबसे बड़ा विदेशी समुदाय हैं और इनकी संख्या लगभग 1.06 million के आसपास है। इस तरह की कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई से साफ है कि खाड़ी देशों में फर्जी दस्तावेजों और दोहरी नागरिकता को लेकर नियम अब बेहद सख्त हो चुके हैं।