Kuwait ने दी बड़ी राहत, अरेबिक और पाकिस्तानी स्कूलों में ट्यूशन फीस बढ़ाने की मिली मंजूरी.

कुवैत में पढ़ाई करने वाले बच्चों और उनके माता-पिता के लिए एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। Kuwait Ministry of Education ने अरेबिक भाषा और पाकिस्तानी पाठ्यक्रम वाले प्राइवेट स्कूलों के लिए फीस बढ़ाने की अनुमति दे दी है। यह नया नियम मौजूदा शैक्षणिक वर्ष से ही लागू कर दिया गया है। लंबे समय से फीस फ्रीज रहने के बाद प्राइवेट एजुकेशन सेक्टर में यह एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस फैसले से आम जनता और वहां रहने वाले प्रवासियों पर सीधा असर पड़ेगा, जिन्हें अब अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए नए नियमों के हिसाब से बजट बनाना होगा।
फीस बढ़ोतरी का नया स्लैब और नियम
मंत्रालय की तरफ से जारी की गई नई गाइडलाइंस के मुताबिक, जो स्कूल सालभर में KD 250 से KD 450 तक की फीस लेते हैं, वे अब अपनी फीस में अधिकतम 15% तक की बढ़ोतरी कर सकते हैं। वहीं जिन स्कूलों की फीस KD 451 या उससे ज्यादा है, वे फीस में अधिकतम 10% तक की बढ़ोतरी कर सकते हैं। यह नियम साफ करता है कि स्कूल इस बढ़ोतरी का फायदा केवल एक ही बार उठा सकेंगे। इसके साथ ही स्कूलों की यह जिम्मेदारी तय की गई है कि वे नई फीस के हिसाब से ही बच्चों को बेहतरीन सुविधाएं और सेवाएं प्रदान करें।
पैसा चुकाने का नया तरीका और तीन किस्तों का नियम
फीस भरने के तरीके में भी सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब स्कूलों को अभिभावकों से एक बार में पूरा पैसा लेने के बजाय फीस को तीन बराबर किस्तों में वसूलना होगा। पहली किस्त रजिस्ट्रेशन फीस के साथ बच्चे के स्कूल जाने के पहले हफ्ते में ही जमा करनी होगी। दूसरी किस्त दूसरे टर्म के पहले हफ्ते में देनी होगी। वहीं पाकिस्तानी स्कूलों के लिए तीसरी किस्त तीसरे टर्म के पहले हफ्ते में चुकानी होगी। मंत्रालय ने सभी स्कूलों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे इन किस्तों की संख्या, उनकी कीमत या तय तारीखों में अपनी मर्जी से कोई भी बदलाव नहीं कर सकते हैं।
अभिभावकों और छात्रों के अधिकारों की सुरक्षा
बच्चों की पढ़ाई बीच में न रुके, इसके लिए शिक्षा मंत्रालय ने एक बहुत ही सख्त नियम बनाया है। अब कोई भी स्कूल इस बात पर रोक नहीं लगा सकता कि यदि किसी की फीस समय पर नहीं भरी गई, तो बच्चे को क्लास में बैठने न दिया जाए। इसके अलावा बकाया फीस के चक्कर में बच्चों को मिड-वर्ष या फाइनल परीक्षाओं में बैठने से नहीं रोका जा सकता और न ही उनके परीक्षा के रिजल्ट रोके जा सकते हैं। अगर कोई बच्चा फेल होता है या उसे री-एग्जाम देना है, तो इसकी जानकारी स्कूल को एसएमएस, ईमेल या पोस्टल मेल के जरिए माता-पिता तक पहुंचानी होगी।
स्कूल बदलने पर फीस का हिसाब
अगर कोई छात्र शैक्षणिक वर्ष शुरू होने के बाद अपना स्कूल बदलता है, तो पुराने नियमों के तहत पिछला स्कूल पहली किस्त की ड्यू डेट निकलने पर सालभर की आधी फीस और दूसरी किस्त की ड्यू डेट निकलने पर पूरे साल की फीस वसूलने का हकदार होगा। इसके साथ ही नया स्कूल छात्र को उस अवधि के लिए कोई चार्ज नहीं ले पाएगा जो उसने पुराने संस्थान में बिताई है। इस पूरी नीति के तहत सभी स्कूलों को अपनी अप्रूव्ड फीस की लिस्ट Financial & Administrative Affairs Department of the General Administration of Private Education को भेजनी होगी और इसे अपनी वेबसाइट या स्कूल के नोटिस बोर्ड पर भी लगाना अनिवार्य होगा। इससे पहले मिनिस्ट्रियल रिजॉल्यूशन नंबर 375 ऑफ 2025 के तहत भारतीय CBSE स्कूलों को भी इसी तरह की 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दी गई थी।