Kuwait Banks Loan Rule: कुवैत में शिक्षकों की छंटनी के बाद बैंकों ने बदला लोन नियम, अब इन प्रवासियों के लिए कर्ज लेना हुआ मुश्किल

कुवैत के वित्तीय संस्थानों ने देश में रहने वाले प्रवासियों के लिए लोन देने के नियमों को काफी सख्त कर दिया है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा बड़े पैमाने पर शिक्षकों की छंटनी किए जाने के बाद बैंकों ने यह कदम उठाया है। द टाइम्स कुवैत और गल्फ न्यूज की रिपोर्ट्स के अनुसार, अब बैंकों ने चुनिंदा प्रोफेशन वाले लोगों को ज्यादा क्रेडिट रिस्क यानी जोखिम भरा मानना शुरू कर दिया है। इस बदलाव का सीधा असर उन भारतीय और अन्य विदेशी नागरिकों पर पड़ रहा है जो वहां नौकरी कर रहे हैं और लोन लेने की सोच रहे हैं।
शिक्षा मंत्रालय के फैसले से बदला बैंकों का रुख
कुवैत के शिक्षा मंत्रालय ने 7 से 8 सितंबर 2026 के बीच एक बड़ा प्लान शुरू किया था, जिसके तहत विभिन्न विषयों में कुल 33,268 शिक्षण पदों को सरप्लस यानी अतिरिक्त माना गया। इस योजना का पहला चरण लागू करते हुए सरकार ने 7,019 प्रवासी शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दीं। इनमें 1,551 पुरुष और 5,468 महिलाएं शामिल हैं। इस छंटनी का मुख्य उद्देश्य सालाना लगभग 4.2 करोड़ कुवैती दीनार (KD) की बचत करना है। सरकारी 'साहिल' ऐप के जरिए शिक्षकों को इसकी सूचना दी गई, जिससे शारीरिक शिक्षा और इस्लामिक शिक्षा के क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। नौकरी जाने के बाद अब इन शिक्षकों के सामने अपने पुराने पर्सनल लोन, घर का किराया और बच्चों की स्कूल फीस भरने को लेकर बड़ी चिंता खड़ी हो गई है क्योंकि वे अपने मिलने वाले अंतिम सेवा लाभ (end-of-service benefits) पर निर्भर हैं।
लोन देने के लिए बैंकों ने तय किए नए कड़े मानक
इन छंटनी के बाद कुवैती बैंकों ने लोन देने के तरीकों में बदलाव करते हुए एक तरह की 'ग्रे लिस्ट' तैयार की है। अब बैंक लोन मंजूर करने से पहले कई नई बातों की गहराई से जांच कर रहे हैं। इसमें सबसे अहम बात यह है कि आवेदक का पेशा कौन सा है। सरप्लस विषयों के शिक्षक और कोऑपरेटिव सोसाइटी में काम करने वाले कर्मचारियों को अब लोन पाने के लिए बड़ी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा कंपनी की गुणवत्ता भी देखी जा रही है, जिसमें कुवैत स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड कंपनियों के कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जा रही है। नौकरी की अवधि भी देखी जा रही है, जहां 10 साल या उससे ज्यादा समय से काम कर रहे लोगों को थोड़ा फायदा मिल रहा है क्योंकि उनका मुआवजा अधिक होता है।
सैलरी की सीमा और न्यूनतम आय में बदलाव
बैंकों ने न्यूनतम सैलरी की सीमा को भी बढ़ा दिया है। पहले जहां न्यूनतम सैलरी 250 से 300 KD थी, वहीं अब कई बैंक इसे बढ़ाकर 400 से 600 KD के बीच मांग रहे हैं। कुवैत के सेंट्रल बैंक का नियम अभी भी वही है जिसके तहत मासिक किस्त (EMI) नेट सैलरी के 40 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकती है। हालांकि, कुछ बैंक अब यह शर्त भी रख रहे हैं कि नौकरी जाने की स्थिति में कंपनी यह गारंटी दे कि कर्मचारी का अंतिम सेवा लाभ सीधे बैंक खाते में ही जमा होगा।
किन प्रोफेशन के लोगों को अब भी आसानी से मिल रहा है कर्ज
दूसरी तरफ, जो प्रवासी स्वास्थ्य सेवा, इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑयल इंडस्ट्री जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं, उन्हें अभी भी आसानी से कर्ज मिल रहा है। इसके अलावा जिन शिक्षकों के विषय सरप्लस सूची में नहीं हैं, उन्हें भी राहत मिली है। योग्य लोग अभी भी अधिकतम 95,000 KD तक का कंबाइंड कंज्यूमर और हाउसिंग फाइनेंस ले सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि किसी को 1,100 KD की मासिक किस्त चुकानी है, तो उसकी सैलरी लगभग 2,750 KD होनी चाहिए। इसी तरह, 25,000 KD के लोन के लिए जिसकी मासिक किस्त 490 KD है, आमतौर पर 1,225 KD सैलरी की जरूरत होती है। वित्तीय जानकारों ने नौकरी गंवाने वाले प्रवासियों को सलाह दी है कि वे कानूनी कार्रवाई या यात्रा प्रतिबंध से बचने के लिए तुरंत अपने बैंक से संपर्क करें और लोन रीस्ट्रक्चरिंग के रास्ते तलाशें।