Kuwait Base Attack: कुवैत के अली अल सालेम एयर बेस पर ईरान का बड़ा हमला, अमेरिकी सैनिकों को बनाया निशाना.

कुवैत में सुरक्षा हालात उस समय तनावपूर्ण हो गए जब 2 सितंबर 2026 को ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स यानी IRGC ने कुवैत स्थित अली अल सालेम एयर बेस पर जोरदार मिसाइल और ड्रोन से हमला कर दिया। इस हमले के बाद पूरे इलाके में अफरातफरी मच गई और बेस पर मौजूद लोगों में डर का माहौल बन गया। ईरान की तरफ से दावा किया गया कि यह हमला बेस पर मौजूद अमेरिकी कमांडर के हेडक्वार्टर और रहने की जगह को ध्यान में रखकर किया गया था। इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिकी सेना को नुकसान पहुंचने और कई अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की बात कही गई है। इस घटना से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और खासकर वहां काम करने वाले भारतीयों की चिंताएं भी बढ़ गई हैं, क्योंकि इस तरह के क्षेत्रीय तनाव से आम जनजीवन और सुरक्षा पर सीधा असर पड़ता है।
कुवैत बेस पर भारी नुकसान और ईरान का दावा
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्स ने अपनी आधिकारिक बयान में बताया कि इस संयुक्त मिसाइल और ड्रोन हमले की वजह से एयर बेस पर बने ड्रोन हैंगर और डिप्लॉयमेंट रैंप में भयानक आग लग गई। इस आगजनी में कई ड्रोन पूरी तरह तबाह हो गए, जिनके बारे में ईरान का आरोप था कि उनका इस्तेमाल पहले ईरानी हितों के खिलाफ किया गया था। हमले के बाद IRGC ने कुवैत के आम लोगों को एक संदेश जारी किया जिसमें साफ कहा गया कि उनका निशाना केवल अमेरिकी सैन्य मौजूदगी है। उन्होंने कुवैत में मौजूद अमेरिकी फौजों से तुरंत देश छोड़ने की मांग की। तेहरान सरकार ने इस हमले को पिछले दिन दक्षिणी ईरान के सिरीक शहर में एक रिहायशी इमारत पर हुए अमेरिकी हमले का सीधा बदला बताया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, उस अमेरिकी हमले में एक बच्चे समेत चार लोगों की मौत हो गई थी और करीब सत्तर लोग घायल हुए थे।
कुवैत और अमेरिका की प्रतिक्रिया
इस खतरनाक सैन्य टकराव के बीच 1 सितंबर 2026 को कुवैत सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि उनके देश की एयर डिफेंस प्रणाली ने आसमान में दुश्मन की आक्रामकता का डटकर मुकाबला किया और ईरानी हमलों को रोकने की कोशिश की। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए wam.ae पर आधिकारिक रिपोर्ट देखी जा सकती है। यह पूरा विवाद तब और बढ़ गया जब अमेरिकी सेंट्रल कमांड यानी CENTCOM ने 1 सितंबर 2026 की देर रात ईरान के अंदर लगभग 100 ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। इन अमेरिकी हमलों में ईरान की एयर डिफेंस प्रणालियां, रडार, समुद्री संपत्तियां और बारूदी सुरंग बिछाने की क्षमताएं शामिल थीं। अमेरिकी सेना का कहना था कि यह कार्रवाई फारसी की खाड़ी यानी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में कमर्शियल जहाजों और अमेरिकी सैनिकों पर ईरान द्वारा किए गए हमलों के जवाब में की गई थी। कुवैत के अलावा ईरान ने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयर बेस और कैंप टिटिन के साथ-साथ बहरीन और इराक के एरबिल में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर भी एक साथ हमले किए।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता और चेतावनियां
इस बड़े क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने तेहरान को सख्त चेतावनी दी है कि यदि ईरान की तरफ से आगे कोई भी जवाबी कार्रवाई की गई तो अमेरिका की तरफ से और भी ज्यादा ताकतवर और बड़े स्तर पर जवाब दिया जाएगा। दूसरी ओर, संयुक्त राष्ट्र यानी UN के महासचिव Antonio Guterres ने इस स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत की मेज पर लौटने की अपील की है और क्षेत्रीय अस्थिरता को रोकने के लिए अत्यधिक संयम बरतने की बात कही है। खाड़ी देशों में काम करने वाले लाखों प्रवासियों के लिए यह स्थिति काफी संवेदनशील बनी हुई है क्योंकि इस तरह के युद्ध जैसे हालात से व्यापार, उड़ानों और सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ता है।