आतंकवाद और टेरर फंडिंग पर कुवैत का कड़ा प्रहार, नियमों के उल्लंघन पर लगेगा भारी जुर्माना

कुवैत ने एक बार फिर दुनिया को यह साफ कर दिया है कि वह आतंकवाद और चरमपंथ के खिलाफ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। कुवैत समाचार एजेंसी (KUNA) के अनुसार, देश ने आतंकवाद के वित्तपोषण (टेरर फंडिंग) के स्रोतों को पूरी तरह खत्म करने और चरमपंथी विचारधाराओं से निपटने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। इस दिशा में कुवैत ने साल 2025 और 2026 के दौरान अपने कानूनों में बड़े बदलाव किए हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों, खासकर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (FATF) के नियमों का पालन किया जा सके।
सरकार ने इस लड़ाई को कानूनी मजबूती देने के लिए 'डिक्री-लॉ नंबर 76 ऑफ 2025' लागू किया है। इसके तहत अब पहचान सत्यापन (identity verification) के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है और नियमों को लागू करने के तरीके पहले से कहीं अधिक सख्त कर दिए गए हैं। कुवैत सरकार ने अब उन व्यक्तियों और संस्थाओं की एक घरेलू सूची भी जारी की है, जिनका संबंध आतंकवाद से पाया गया है।
नियम तोड़ने वालों की खैर नहीं: लाखों का जुर्माना और जेल
आतंकवाद के खिलाफ इस मुहिम में कुवैत ने आर्थिक दंड को बेहद कठोर बनाया है। यदि कोई व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर 5,00,000 कुवैती दीनार (लगभग 16.4 लाख अमेरिकी डॉलर) तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। वहीं, संस्थाओं के लिए यह जुर्माना 50,000 से लेकर 10,00,000 कुवैती दीनार तक हो सकता है।
इसके अलावा, सरकार ने 'हवाला' जैसे अनधिकृत धन हस्तांतरण प्रणालियों (Alternative Remittance Systems) पर पूरी तरह रोक लगा दी है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा लागू इस कानून के तहत, बिना लाइसेंस के पैसे भेजने या मंगाने वालों को छह महीने की जेल और 3,000 कुवैती दीनार के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
बैंकिंग अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने एक विशेष कार्यालय की स्थापना की घोषणा की है। यह ऑफिस बैंक धोखाधड़ी, साइबर फ्रॉड और बाउंस चेक जैसे गंभीर वित्तीय अपराधों की जांच करेगा।
कुवैत की यह सख्ती केवल घरेलू स्तर तक सीमित नहीं है। संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति को संबोधित करते हुए राजनयिक अटैशे जाना अल-धफिरी ने स्पष्ट किया कि कुवैत का कानूनी ढांचा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और वैश्विक मानवाधिकार सिद्धांतों के अनुरूप है। देश अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग से चरमपंथी विचारधाराओं को रोकने के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रमों पर भी विशेष जोर दे रहा है।