कुवैत कोर्ट का बड़ा फैसला: 23 हजार दीनार के धोखाधड़ी मामले में प्रवासी बरी

Nura Basta9 October 20262 min read0 viewsKuwait
कुवैत कोर्ट का बड़ा फैसला: 23 हजार दीनार के धोखाधड़ी मामले में प्रवासी बरी

कुवैत की अपील अदालत ने एक प्रवासी नागरिक के लिए बड़ी राहत देते हुए उन्हें 23,000 कुवैती दीनार (लगभग 62-63 लाख रुपये) के निवेश और यूरोपीय रेजिडेंसी स्कीम से जुड़े धोखाधड़ी के मामले में बरी कर दिया है। यह फैसला निचली अदालत के उस आदेश को पलटते हुए आया है, जिसमें आरोपी को तीन साल की जेल, 200 दीनार जुर्माना और निर्वासन (deportation) की सजा सुनाई गई थी।

मामले की गहराई में जाएं तो पता चलता है कि यह पूरा विवाद एक रेस्टोरेंट प्रोजेक्ट और यूरोपीय देशों में रेजिडेंसी दिलाने के वादे से शुरू हुआ था। निचली अदालत ने यह फैसला तब सुनाया था जब आरोपी कोर्ट में मौजूद नहीं थे। हालांकि, जब इस फैसले के खिलाफ अपील की गई, तो सच्चाई सामने आई। कोर्ट की कार्यवाही के दौरान यह साबित हुआ कि रेस्टोरेंट का प्रोजेक्ट वास्तव में शुरू किया गया था और इसे शिकायतकर्ताओं में से एक के नाम पर पंजीकृत भी किया गया था।

निवेश और धोखाधड़ी के बीच का अंतर

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अदालत में बचाव पक्ष के वकील जराह अल-मलिक ने दलील दी कि यह मामला किसी आपराधिक साजिश का नहीं, बल्कि एक वैध निवेश समझौते का था। सबूत के तौर पर प्रोजेक्ट की शुरुआत की तस्वीरें पेश की गईं, जिनमें शिकायतकर्ता के पिता की मौजूदगी भी देखी गई। विवाद तब शुरू हुआ जब वादा की गई यूरोपीय रेजिडेंसी नहीं मिल पाई और दुकान का किराया न चुका पाने के कारण दुकान बंद हो गई।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इस मामले में 'आपराधिक धोखे' के तत्व मौजूद नहीं थे। कोर्ट ने माना कि धन का हस्तांतरण एक वास्तविक निवेश समझौते के तहत किया गया था, न कि किसी को गुमराह कर पैसा हड़पने के लिए। इस फैसले ने यह साफ कर दिया कि किसी बिजनेस वेंचर का असफल होना और आपराधिक धोखाधड़ी करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।

यह मामला उन प्रवासियों के लिए एक सबक है जो बिजनेस और रेजिडेंसी के लुभावने ऑफर में निवेश करते हैं, क्योंकि ऐसे समझौतों में कानूनी जोखिम काफी अधिक होते हैं।

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