Kuwait News: कुवैत कोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्व सांसद बदर अल-दहूम को एक साल की कड़ी सजा

Aanya6 September 20262 min read58 viewsKuwait
Kuwait News: कुवैत कोर्ट का बड़ा फैसला, पूर्व सांसद बदर अल-दहूम को एक साल की कड़ी सजा

कुवैत की अदालत से एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है जहाँ कोर्ट ऑफ कैसेशन ने देश के पूर्व सांसद बदर अल-दहूम को एक साल की जेल और कड़ी मेहनत की सजा सुनाई है। यह मामला एक चुनावी रैली के दौरान संवैधानिक अदालत के जजों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने से जुड़ा हुआ है जिसके बाद देश की राजनीति और कानूनी गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। कुवैत के कानून और न्याय व्यवस्था से जुड़े इस मामले में अदालती कार्रवाई लगातार सुर्खियों में बनी हुई है और आम लोग भी इस घटनाक्रम पर पूरी नजर बनाए हुए हैं।

पुराना फैसला बदला और सख्त हुई सजा

इस ताजा फैसले ने क्रिमिनल कोर्ट के पिछले उस फैसले को पूरी तरह से पलट दिया है जिसमें बदर अल-दहूम को राहत दी गई थी। पिछले फैसले में अदालत ने एक साल की निलंबित सजा सुनाई थी और पांच हजार दीनार का जमानत शुल्क तय किया था। इसके अलावा उन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना अकाउंट डिलीट करने का आदेश भी दिया गया था लेकिन अब कोर्ट ऑफ कैसेशन के नए आदेश के बाद उनकी मुश्किलें काफी ज्यादा बढ़ गई हैं और उन्हें जेल की सजा काटनी होगी।

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कौन हैं बदर अल-दहूम और उनका राजनीतिक सफर

बदर अल-दहूम का जन्म 16 मार्च 1975 को हुआ था और वे कुवैत के एक जाने-माने राजनीतिज्ञ होने के साथ-साथ नेशनल असेंबली के पूर्व डिप्टी भी रह चुके हैं। अकादमिक तौर पर वे कुवैत इंटरनेशनल Law स्कूल में प्रोफेसर हैं और उनके पास इस्लामिक कानून तथा तुलनात्मक न्यायशास्त्र में पीएचडी की डिग्री है। उनके जीवन में कानूनी विवादों का पुराना इतिहास रहा है और न्यायपालिका तथा अमीर से जुड़े मामलों में उनका नाम पहले भी चर्चा में आ चुका है।

साल 2021 की वो घटना जिसने बढ़ाई थी राजनीतिक हलचल

मार्च 2021 में कुवैत की संवैधानिक अदालत ने अमीर का अपमान करने से जुड़े एक पुराने मामले में उनका संसदीय सदस्यता रद्द कर दिया था। उस फैसले के बाद देश में भारी राजनीतिक तनाव पैदा हो गया था और कई समर्थकों की गिरफ्तारी भी हुई थी। इसके अलावा अलकारामा संगठन ने भी पहले कुवैत में न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर चिंता जताई थी और इसी तरह के मामलों में कानूनों के पुराने प्रभाव से लागू किए जाने की आलोचना की थी।

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