होरमुज़ संकट के बीच कुवैत ने खाद्य सुरक्षा के लिए आपात उपाय शुरू किए

कुवैत: कुवैत ने होरमुज़ जलडमरूमध्य में समुद्री अस्थिरता से खतरे में पड़ी अपनी खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए आपातकालीन उपायों की शुरुआत की है। वित्त मंत्री डॉ. याक़ूब अल-रिफ़ाई ने 14 अक्टूबर 2026 को यह जानकारी दी।
अल-रिफ़ाई ने बैंकॉक में चल रही विश्व बैंक समूह और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की वार्षिक बैठकों के दौरान यह बात कही। ये बैठकें 18 अक्टूबर 2026 तक चलेंगी। उनके मुताबिक इस क्षेत्र में समुद्री हालात बिगड़ने से शिपिंग का खर्च बढ़ रहा है और जरूरी वस्तुओं व उर्वरकों के आने-जाने पर खतरा मंडरा रहा है।
इन जोखिमों से निपटने के लिए सरकार सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बीच तालमेल बढ़ा रही है। रणनीतिक खाद्य भंडार को मजबूत किया जा रहा है और जरूरी आयात के लिए शिपिंग लागत पर सब्सिडी दी जा रही है।
क्षेत्रीय रसद रणनीति के तहत कुवैत सऊदी अरब और ओमान के साथ मिलकर वैकल्पिक समुद्री मार्ग स्थापित करने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए काम कर रहा है। अल-रिफ़ाई ने कहा कि आपूर्ति श्रृंखला को विविध बनाने और खाद्य सुरक्षा स्थिर रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।
यह पहल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के ताजा विश्व आर्थिक दृष्टिकोण के बाद आई है। कोष ने 2026 में कुवैत, इराक, कतर और बहरीन की अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट का अनुमान जताया है। इसके लिए उसने क्षेत्रीय संघर्ष और जलमार्गों की नाकेबंदी को मुख्य कारण बताया है। कोष के मुताबिक होरमुज़ खुलने की स्थिति में 2027 में सुधार की उम्मीद है, लेकिन फिलहाल रसद से जुड़ा दबाव गंभीर बना हुआ है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के मुख्य अर्थशास्त्री माक्सिमो टोरेरो ने 13 अक्टूबर 2026 को चेतावनी दी कि वैश्विक खाद्य सुरक्षा के लिए बढ़ती कीमतें फिलहाल भौतिक कमी से बड़ा खतरा हैं। उन्होंने बताया कि होरमुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया में कारोबार होने वाले उर्वरकों का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है।